How To Deal With Toxic In Laws: मॉडल ट्विशा शर्मा की खबर हर तरफ छाई हुई है कि ससुराल वालों ने उसको मार दिया और सास ने उसपर आरोप लगाया है कि वो नशा करती थी. दरअसल टीवी सीरियल्स में सास-बहू के झगड़े देखना जितना आसान और मजेदार लगता है, असल जिंदगी में वही हालात इंसान को अंदर से तोड़ देते हैं. ऐसे ससुराल वाले जो हर बात में दखल दें, ताने मारें, इमोशनल दबाव बनाएं या हर समय तनाव पैदा करें, उनसे निपटना किसी बड़ी मानसिक लड़ाई से कम नहीं होता. परेशानी की जड़ को समझने की कोशिश कीजिएसबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आखिर परेशानी की जड़ क्या है. अक्सर ऐसा व्यवहार अचानक नहीं होता, उसके पीछे नियंत्रण की भावना या इमोशनल सीमाओं की कमी होती है. कई बार ससुराल वाले आपकी परवरिश के तरीकों को नजरअंदाज करते हैं, बिना बताए घर आ जाते हैं या फिर इमोशनल दबाव बनाते हैं. जैसे आपकी निजी जगह की जरूरत को स्वार्थी कहना या खुद को बेबस दिखाकर आपको अपराधबोध महसूस करवाना. पति -पत्नी के बीच अच्छे कम्युनिकेशन होने जरूरीरिश्तों के विशेषज्ञ मानते हैं कि ससुराल की परेशानी अक्सर पति-पत्नी के रिश्ते की परीक्षा बन जाती है. इसलिए सबसे जरूरी है कि दोनों एक टीम की तरह खड़े रहें. अगर किसी के माता-पिता बार-बार सीमाएं पार कर रहे हैं, तो उसी व्यक्ति को अपने परिवार से बात करनी चाहिए. क्योंकि अगर दूसरा जीवनसाथी शिकायत करेगा, तो अक्सर यह धारणा बन जाती है कि उसने परिवार को अलग कर दिया.चीजों के लिए नियम होना जरूरीसीमाएं तय करना भी बेहद जरूरी है, लेकिन सिर्फ नियम बना देने से कुछ नहीं होता. इसका मतलब साफ तौर पर यह तय करना है कि आप क्या सहन करेंगे और क्या नहीं. एक्सपर्ट कहते हैं कि बार-बार सफाई देने से सामने वाला बहस करने लगता है.इसे भी पढ़ें - Dog Pain Signs: बेजुबान कुत्ते दर्द में होने पर देते हैं ये संकेत, पेट पेरेंट्स भूलकर भी न करें इग्नोरखुद को ऐसे करें तैयारकुछ हालात ऐसे होते हैं जहां समझाने का भी असर नहीं होता. ऐसे समय में मनोवैज्ञानिक ग्रे रॉक तरीका अपनाने की सलाह देते हैं. यानी खुद को इतना शांत और सामान्य रखना कि सामने वाले को झगड़ा बढ़ाने का मौका ही ना मिले. छोटे और सीधे जवाब जैसे ठीक है, हम्म या समझ गई या गया कई बार बेवजह के विवाद को खत्म कर देते हैं. इसके अलावा लंबे घरेलू मेल-मिलाप की जगह बाहर थोड़ी देर के लिए मिलना बेहतर माना जाता है. इससे माहौल भी हल्का रहता है और जरूरत पड़ने पर वहां से निकलना भी आसान होता है. अगर व्यवहार मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाने लगे, तो दूरी बना लेना भी गलत नहीं माना जाता.इस चीज का रखें ध्यानसबसे जरूरी बात यह है कि आप दूसरों का व्यवहार नियंत्रित नहीं कर सकते, लेकिन अपनी प्रतिक्रिया जरूर संभाल सकते हैं. अगर आपकी तय की गई सीमाओं पर सामने वाला गुस्सा करता है, नाराज होता है या चुप्पी साध लेता है, तो यह उनकी सोच दिखाता है, आपकी गलती नहीं. अपनी मेंटल को प्राथमिकता दें.इसे भी पढ़ें - Ebola Virus: कितना खतरनाक है इबोला का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन, भारत को इससे कितना खतरा?