अपने औषधीय ज्ञान के लिए कभी वन्य क्षेत्रों में बड़ी पहचान रखने वाले 'सहरिया' खुद टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) के जाल में फंस गए हैं। एक अध्ययन में सामने आया है कि प्रदेश की इस विशेष पिछड़ी जनजाति में टीबी संक्रमण की दर राष्ट्रीय औसत से 17 गुना तक अधिक है।