काेर्ट ने अपनी तल्ख टिप्पणी में कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है जहां याचिकाकर्ता जबलपुर नगर निगम के कार्यालय में आए और दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करने लगे।