दिल्ली अग्निकांड-वेंटिलेटर पर लेटे राधेश्याम अग्रवाल की 3 पीढ़ियां खत्म:पत्नी, बेटे-बहू, 2 पोतियों की मौत से अब तक बेखबर; एक साथ जलीं चिताएं, रिश्तेदारों ने दी मुखाग्नि

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दिल्ली के मालवीय नगर के होटल फ्लोरिश स्टे में लगी आग की लपटों ने गुरुग्राम के सेक्टर-46 में रहने वाले अग्रवाल परिवार की खुशियों को सदा के लिए राख के ढेर में बदल दिया। एक ही झटके में परिवार की तीन पीढ़ियां खत्म हो गईं। श्मशान घाट पर जब एक साथ पांच चिताएं सजीं, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। इस पूरे हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू परिवार के सबसे बुजुर्ग सदस्य राधेश्याम अग्रवाल (70 वर्ष) से जुड़ा है। वे अभी भी साकेत के मैक्स अस्पताल के ICU में वेंटिलेटर पर भर्ती है। इसी बुजुर्ग पिता की तीमारदारी और देखभाल के लिए विवेक अग्रवाल अपनी पत्नी तर्जनी अग्रवाल, मां प्रेमलता अग्रवाल और दोनों बेटियों जीविशा व वारिया के साथ दिल्ली के उस बदकिस्मत होटल में ठहरे हुए थे, जहां से वे अस्पताल के नजदीक रह सकें। राधेश्याम अभी तक इस बात से पूरी तरह अनजान हैं कि जिस बेटे, बहू, पत्नी और पोतियों के सहारे वे जी रहे थे, उनका अब इस दुनिया में नामोनिशान नहीं बचा है। अस्पताल के सन्नाटे से बेखबर, बुजुर्ग पिता के जीवन का पूरा संसार बाहर उजड़ चुका है। यह दुख और भी बड़ा इसलिए हो जाता है कि इन पांचों के अलावा उनके तीन रिश्तेदार भी इस अग्निकांड की भेंट चढ़ गए, जिनमें राजस्थान निवासी जवरी लाल अग्रवाल (70) और मौसी कमला अग्रवाल (68) और मामा अशोक पंसारी भी शामिल है। ये तीनों भी राधेश्याम को देखने दिल्ली आए थे और परिवार संग ही होटल में ठहरे थे। पांच चिताओं से बिखर गया प्रेम बंसल का लाड-प्यार तर्जनी के पिता प्रेम बंसल गुरुग्राम के सेक्टर-102 स्थित अडानी टावर सोसाइटी में रहते हैं और बड़े प्रॉपर्टी डीलर हैं। वह अपनी बेटी और नातिनों पर जान छिड़कते थे। नातिनों को प्यार से एंजल और पर्ल भी बुलाते थे। उन्होंने अपनी लाडली बेटी तर्जनी और दामाद विवेक को सेक्टर-46 की आलीशान कोठी गिफ्ट में दी थी, जहां यह परिवार वर्तमान में रहता था। इतना ही नहीं, उन्होंने दोनों नातिनों के सुरक्षित भविष्य के लिए उनके नाम पर भी एक-एक फ्लैट भी करवा रखा था। मगर, काल का कहर देखिए कि बेटी-दामाद को गिफ्ट की गई यह आलीशान कोठी आज सूनी पड़ी है। जिन नातियों के नाम फ्लैट किए गए थे, वे अब इस दुनिया को अलविदा कह चुकी हैं। रिश्तेदारों ने कांपते हाथों से दी चिताओं को मुखाग्नि सेक्टर-32 के मुक्तिधाम श्मशान में जब एक साथ पांच शव पहुंचे, तो वहां कोहराम मच गया। एक के बाद एक पांच चिताएं कतार में लगाई गईं। यह दृश्य इतना मार्मिक था कि परंपरा और नियति के फेर में रिश्तेदारों ने बेहद भारी मन और कांपते हाथों से मुखाग्नि दी। विवेक अग्रवाल को उनके चचेरे भाई अभय अग्रवाल, भौतिक अग्रवाल, नितिन, मृणाल और आरुष ने नम आंखों से मुखाग्नि दी। तर्जनी अग्रवाल के अंतिम संस्कार की रस्म उनके सगे भाई अंशुल बंसल ने पूरी की। विवेक की मां प्रेमलता की चिता को श्याम अग्रवाल, महेंद्र, विक्रम, राजेंद्र और दीपक ने मुखाग्नि दी, जबकि दोनों मासूम बेटियों को उनके चचेरे भाई कुनाल, आरुष और हर्ष ने मुखाग्नि देकर हमेशा के लिए पंचतत्व में विलीन कर दिया। विवेक ने बेटी को दिल्ली आने से मना किया था चचेरे भाई वेंक्टेश अग्रवाल ने बताया कि जीविशा बेंगलुरु में रहकर बीटेक की पढ़ाई कर रही थी। गुरुवार को उसकी एक महत्वपूर्ण परीक्षा थी। जब उसे पता चला कि उसके दादाजी दिल्ली के मैक्स अस्पताल में भर्ती हैं, तो उसने आने इच्छा जताई, लेकिन पिता विवेक ने उसे फोन पर साफ मना कर दिया था। विवेक ने कहा था कि मात्र एक दिन के लिए बेंगलुरु से दिल्ली आना और फिर परीक्षा के लिए तुरंत वापस लौटना बहुत थकान भरा होगा। उन्होंने जीविशा को बेंगलुरु में ही रहकर पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा था, लेकिन वह अपने दादाजी को देखने की जिद अड़ गई थी। इसके बाद विवेक ने आने-जाने की फ्लाइट की टिकट करवा दी थी। मामा बोले- जिसे पाला-पोसा, उसी का अंतिम संस्कार करना पड़ा तर्जनी के मामा अजय गुप्ता से भास्कर रिपोर्टर ने बात की। उन्होंने कहा- जिस भांजी को अपने हाथों से पाला-पोसा, उसकी शादी की, आज उसी का अंतिम संस्कार भी अपने हाथों से करना पड़ा। इससे बड़ी बदकिस्मती क्या होगी। अब हमारे पास बचा ही क्या है। जीना तो पड़ेगा, लेकिन जीने की वजह चली गई। तर्जनी के चचेरे भाई अंकुश गुप्ता ने भास्कर से कहा कि परिवार के सभी लोगों की मौत हो गई। घर में दीया जलाने वाला भी कोई नहीं बचा। परिवार मौसा जी को देखने गया था। मौसा जी अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन उनके साथ गए परिवार के बाकी सदस्य अब इस दुनिया में नहीं रहे। अग्रवाल परिवार के तीन रिश्तदार भी चढ़े अग्निकांड की भेंट… सीए के ससुर ने बताई इस दर्दनाक हादसे की कहानी… बेटी का फोन आया-होटल में आग लगी है : ससुर प्रेम बंसल ने बताया-मेरी बेटी तर्जनी की शादी गुरुग्राम के सेक्टर-46 निवासी सीए विवेक अग्रवाल से हुई थी। तीन दिन पहले यानि मंगलवार को विवेक के पिता राधेश्याम अग्रवाल की तबीयत खराब हो गई थी, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। राधेश्याम को देखने ही परिवार दिल्ली गया था। बुधवार सुबह बेटी का फोन आया, जिसने घबराकर बताया-हम जिस होटल में ठहरे थे उसमें आग लग गई है। होटल पहुंचे तो चारों तरफ आग ही आग थी : प्रेम बंसल ने बताया-जब मैं होटल पहुंचा तो यहां चारों तरफ आग की लपटें थीं। हम बदहवास हो गए। थोड़ी देर में क्लियर हो गया कि मेरी बेटी-दामाद के परिवार में कोई जिंदा नहीं बचा। विवेक-तर्जनी की दोनों बेटियां एंजल व पर्ल, विवेक की मां प्रेमलता अग्रवाल, मामा अशोक पंसारी, मौसा जवरी लाल व मौसी कमला सब हादसे का शिकार हो गए। विवेक ने होटल में रूम लिए, बड़ी बेटी बेंगलुरु से आई : विवेक ने होटल में दो कमरे बुक किए थे। उनकी बड़ी बेटी 12वीं करने के बाद बीटेक करने के लिए बेंगलुरु रहती थी। उसे कल ही दादा से मिलने के लिए बुलाया गया था। वो फ्लाइट से पहुंची थी। छोटी बेटी 11वीं क्लास में है। सभी मौतें 70 से 85 फीसदी तक झुलसने या दम घुटने से हुई। 10 तस्वीरों में देखिए दिल्ली होटल फ्लोरिश स्टे अग्निकांड … ---------------------------------- हादसे से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… दिल्ली- होटल में आग से 21 मौतें, मालिक हिरासत में:मरने वालों में 11 विदेशी, 8 राजस्थान-हरियाणा के; होटल की फायर NOC नहीं थीं दिल्ली होटल अग्निकांड-गुरुग्राम के CA का पूरा परिवार जिंदा जला:5 फैमिली मेंबर, 3 रिश्तेदार मारे गए; बीमार पिता को देखने आए थे