पोप लियो XIV को लंग कैंसर होने की पुष्टी हुई है। वेटिकन सिटी ने मेडिकल बुलेटिन में यह जानकारी दी। 71 वर्षीय पोप की मंगलवार को रोम के अगोस्तीनो जेमेली अस्पताल में 90 मिनट की सर्जरी हुई। जांच में फेफड़ों की ग्रंथि कोशिकाओं से विकसित होने वाले कैंसी की पुष्टि हुई। वेटिकन के मुताबिक, सर्जरी सफल रही और इसमें कोई परेशानी नहीं हुई। पोप करीब एक सप्ताह अस्पताल में रहकर स्वास्थ्य लाभ करेंगे। वेटिकन ने बताया कि सर्जरी के बाद पोप सामान्य रूप से होश में आए। कुछ देर निगरानी में रखने के बाद उन्हें उनके कमरे में भेज दिया गया। फेफड़ों में गांठ के चलते सर्जरी हुई थी पोप लियो XIV ने रविवार को अपनी सर्जरी की जानकारी दी थी। उन्होंने रोम में सेंट पीटर्स स्क्वायर के सामने बालकनी से लोगों को संबोधित किया था। यह संबोधन पारंपरिक एंजेलस प्रार्थना के बाद हुआ था। पोप ने बताया था कि उनके फेफड़े की गांठ सीमित है और शुरुआती चरण में ही इसका पता चल गया। इसके बावजूद डॉक्टरों ने उन्हें गांठ हटाने के लिए सर्जरी कराने की सलाह दी थी। सर्जरी में उसे हटाने के बाद कैंसर का पता चला। पोप को उनके स्वास्थ के चलते बेड रेस्ट दिया गया है। उनके सार्वजनिक कार्यक्रम भी 20 अक्टूबर तक रद्द कर दिया गया है। कैंसर फैलने की जांच कर रहे डॉक्टर पोप के अस्पताल में भर्ती होने की खबर सुनकर बड़ी संख्या में लोग उनसे मिलने पहुंचे। लोगों ने घंटों इंतजार किया। पोप की कार पहुंचने पर उन्होंने उनका स्वागत किया। पोप ने भी कार की खिड़की से हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन किया।ट AFP के मुताबिक, उनकी सफल सर्जरी के बाद डॉक्टर अब जांच कर रहे हैं कि कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों में तो नहीं फैला है। जानिए पोप कौन होते हैं और कैसे चुने जाते हैं… पोप कौन होते हैं? पोप कैथोलिक ईसाई धर्म के सबसे बड़े धर्मगुरु होते हैं। उन्हें दुनिया भर के कैथोलिक ईसाइयों का आध्यात्मिक नेता माना जाता है। जिस तरह हिंदू धर्म में शंकराचार्य जैसे बड़े धार्मिक गुरु होते हैं, उसी तरह कैथोलिक ईसाई धर्म में पोप का बहुत अहम स्थान है। हालांकि, दोनों की भूमिका और अधिकार अलग-अलग हैं। पोप वेटिकन सिटी में रहते हैं। यह इटली की राजधानी रोम के अंदर बसा दुनिया का सबसे छोटा देश है। पोप कैथोलिक चर्च के प्रमुख होते हैं और दुनिया भर के चर्चों, पादरियों और बिशपों का मार्गदर्शन करते हैं। वे धार्मिक नियमों, ईसाई शिक्षाओं और नैतिक मुद्दों पर अपनी बात रखते हैं। वे युद्ध, गरीबी और शांति जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी लोगों से अपील करते हैं। पोप कैसे चुने जाते हैं? जब किसी पोप की मृत्यु हो जाती है या वे अपने पद से इस्तीफा दे देते हैं, तब नए पोप को चुनने की प्रक्रिया शुरू होती है। इसके लिए 80 साल से कम उम्र के कार्डिनल वेटिकन में इकट्ठा होते हैं और गुप्त मतदान करते हैं। इस प्रक्रिया को कॉन्क्लेव कहते हैं। दो-तिहाई वोट मिलने पर नए पोप का चुनाव होता है। चुनाव की खबर वेटिकन की सिस्टीन चैपल की चिमनी से निकलने वाले सफेद धुएं के जरिए दुनिया को दी जाती है। काला धुआं निकलने का मतलब है कि अभी नया पोप नहीं चुना गया है। पोप लियो को मई 2025 में चुना गया था पोप लियो XIV का असली नाम रॉबर्ट फ्रांसिस प्रेवोस्ट है। उनका जन्म 14 सितंबर 1955 को अमेरिका के शिकागो शहर में हुआ था। वे कैथोलिक ईसाई धर्म के सबसे बड़े धार्मिक पद पर हैं। 8 मई 2025 को उन्हें कैथोलिक चर्च का 267वां पोप चुना गया था। वे अमेरिका से आने वाले पहले पोप हैं। उनसे पहले पोप फ्रांसिस इस पद पर थे। पोप बनने से पहले लियो XIV ने कई साल तक पादरी, मिशनरी और बिशप के रूप में काम किया। उन्होंने अपनी जिंदगी का लंबा समय दक्षिण अमेरिका के पेरू में बिताया। वहां उन्होंने लोगों के बीच रहकर धार्मिक और सामाजिक काम किए। उन्होंने पेरू के चिक्लायो इलाके में बिशप के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। 2023 में पोप फ्रांसिस ने उन्हें वेटिकन में बिशप चुनने से जुड़े अहम विभाग का प्रमुख बनाया था। बाद में उन्हें कार्डिनल भी बनाया गया। कार्डिनल कैथोलिक चर्च के वरिष्ठ धर्मगुरु होते हैं, जो नए पोप को चुनने में हिस्सा लेते हैं। ------------------------ यह खबर भी पढ़ें… अजरबैजान में 96% मुस्लिम, फिर भी हिजाब बैन हुआ मुस्लिम बहुल देश अजरबैजान में स्कूलों में हिजाब पहनने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। सरकार ने स्कूलों के ड्रेस कोड में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत ऐसे कपड़े पहनने पर रोक लगाई गई है, जिन्हें सरकार धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ मानती है। पूरी खबर पढ़ें…