वर्ष 2009 में बाघों के अस्तित्व पर आए संकट के बाद शुरू हुआ पुनर्स्थापना का अभियान अब संरक्षण की उल्लेखनीय कहानी बन चुका है। पर्यटन से बढ़ी स्थानीय आर्थिक गतिविधियां, संरक्षण की ऐतिहासिक यात्रा को यादगार बनाने स्मारक की मांग उठ रही है।