इजराइल हूती विद्रोहियों के खिलाफ क्यों लड़ना चाहता है:अमेरिका के जरिए नेतन्याहू ने मदद का मैसेज भेजा, सऊदी ने इनकार किया

Wait 5 sec.

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सऊदी अरब से हूतियों के खिलाफ सैन्य अभियान में इजराइल को शामिल करने की इजाजत मांगी है। इजराइली अखबार हारेत्ज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने यह प्रस्ताव अमेरिका की मध्यस्थता के जरिए सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सामने रखा। हालांकि, सऊदी क्राउन प्रिंस ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्हें डर है कि इजराइली सेना की भागीदारी से सऊदी अरब में जनता की नाराजगी बढ़ सकती है। लेकिन इजराइल आखिर इस सैन्य अभियान में जुड़ना क्यों चाहता है… दरअसल इसकी मुख्य रूप से 3 वजहें हैं… 1. इजराइल सऊदी के साथ संबंध मजबूत करना चाहता है सऊदी अरब यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य अभियान चला रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल को उम्मीद थी कि सऊदी अरब के साथ सैन्य सहयोग से दोनों अमेरिकी सहयोगियों के संबंध मजबूत होंगे। इजराइल को यह भी उम्मीद थी कि इससे भविष्य में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध सामान्य करने का समझौता भी हो सकता है। 2. इजराइल ईरान समर्थित हूतियों को कमजोर करना चाहता है ईरान और हूती विद्रोहियों के बीच लंबे समय से संबंध हैं। सऊदी अरब और अमेरिका का आरोप है कि ईरान हूतियों को हथियार, ट्रेनिंग और तकनीकी मदद देता है। इससे हूती ड्रोन और मिसाइलों से हमले करने में सक्षम हुए हैं। इस ही वजह से हूती इजराइल और क्षेत्र के कई देशों के लिए बड़ा सुरक्षा खतरा बन चुके हैं। हूतियों ने क्षेत्रीय समुद्री व्यापार और जहाजों को प्रभावित करने वाले हमले किए हैं। उन्होंने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच इजराइल को भी निशाना बनाया है। इसलिए इजराइल इस सैन्य अभियान में शामिल होकर हूतियों को कमजोर करना चाहता है। 3. इजराइल सऊदी के साथ सैन्य तालमेल भी बढ़ा सकता है हूतियों की गतिविधियों से सऊदी अरब को भी खतरा रहा है। सऊदी अरब लंबे समय से अपनी दक्षिणी सीमा के पास हूतियों को सुरक्षा चुनौती मानता है। इजराइल सऊदी की मदद कर क्षेत्र की एक बड़ी अरब शक्ति के साथ सैन्य तालमेल भी बढ़ सकता है। हालांकि, इससे रियाद के सामने राजनीतिक जोखिम भी हैं। सऊदी अरब से जुड़े सैन्य अभियानों में इजराइली सेना की भागीदारी पर देश के अंदर और पूरे अरब जगत में विरोध हो सकता है। यह विरोध खास तौर पर तब बढ़ सकता है, जब फिलिस्तीनी मुद्दा अब भी हल नहीं हुआ है। सऊदी और इजराइल के बीच फिलिस्तीन को लेकर मतभेद सऊदी अरब और इजराइल के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। हालांकि दोनों ईरान के खिलाफ एक ही रुख अपनाते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प भी कई बार सऊदी से इजराइल के साथ संबंध बनाने की अपील कर चुके है। इसके लिए अमेरिका ने अब्राहम समझौता भी सामने रखा है। अब्राहम समझौते के तहत इजराइल ने 2020 में कई अरब देशों के साथ संबंध सामान्य किए थे। सऊदी अरब का कहना है कि इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने का फैसला फिलिस्तीनी मुद्दे पर प्रगति से जुड़ा होना चाहिए। इसमें एक फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना भी शामिल है। लेकिन नेतन्याहू फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना का विरोध करते रहे हैं। 2015 से जारी है सऊदी और हूतियों की लड़ाई ------------------------- यह खबर भी पढ़ें… सऊदी अरब हूतियों को क्यों नहीं हरा पा रहा: अमेरिकी इंटेलिजेंस और एडवांस हथियार भी बेअसर; अब तेल-गैस की कमाई में हिस्सा मांग रहे विद्रोही सऊदी अरब के पास दुनिया के सबसे आधुनिक हथियारों में शामिल लड़ाकू विमान और मिसाइलें हैं। अमेरिका भी उसे हथियार और खुफिया जानकारी देकर मदद करता रहा है। इसके बावजूद सऊदी अरब यमन के हूती विद्रोहियों को हरा नहीं पाया। पूरी खबर पढ़ें…