डीजे का तेज संगीत, गाड़ियों का शोर या पटाखों की गूंज- आज की आधुनिक दुनिया में हम हर तरफ से तेज आवाजों से घिरे हुए हैं. अक्सर लोग शादियों या पार्टियों में कान फोड़ू संगीत का आनंद तो लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह तेज आवाज हमारे शरीर के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है? विज्ञान के अनुसार, हद से ज्यादा शोर न सिर्फ इंसान को हमेशा के लिए बहरा बना सकता है, बल्कि यह जानलेवा भी साबित हो सकता है. आइए जानते हैं कि हमारे कानों की क्षमता कितनी है और कितने डेसीबल की आवाज इंसान की मौत की वजह बन सकती है.क्या होता है डेसीबल और कितनी आवाज है सुरक्षित?आवाज की तीव्रता या उसके सीधे तीखेपन को मापने के लिए डेसीबल यूनिट का इस्तेमाल किया जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO और डॉक्टरों के मुताबिक, इंसानी कानों के लिए 70 डेसीबल तक की आवाज पूरी तरह से सामान्य और सुरक्षित मानी जाती है. जब हम आपस में सामान्य बातचीत करते हैं, तो वह आवाज लगभग 60 डेसीबल की होती है. पर्यावरण और स्वास्थ्य मानकों के अनुसार, 85 डेसीबल तक की आवाज को हमारे कान अधिकतम 8 घंटे तक ही बिना किसी बड़े नुकसान के बर्दाश्त कर सकते हैं. इससे ज्यादा तेज आवाज में लगातार रहना कानों की नसों को हमेशा के लिए डैमेज कर सकता है.कब शुरू होता है कानों में दर्द और बहरेपन का खतरा?जैसे-जैसे डेसीबल का स्तर बढ़ता है, कानों के लिए खतरा कई गुना बढ़ जाता है. जब आवाज 100 डेसीबल जैसे किसी भारी ट्रैफिक या लाउडस्पीकर के बिल्कुल पास की आवाज तक पहुंचती है, तो मात्र 10 से 15 मिनट में ही इंसानी कान को नुकसान पहुंचना शुरू हो जाता है.इसके बाद 120 से 130 डेसीबल की आवाज जैसे एम्बुलेंस का सायरन या पास से गुजरता हवाई जहाज इंसानी कानों के लिए दर्द की सीमा मानी जाती है. इस स्तर पर पहुंचते ही कानों में तेज दर्द होने लगता है. यदि कोई व्यक्ति 140 से 150 डेसीबल की आवाज जैसे पास में फटने वाला बड़ा पटाखा या बंदूक की गोली के संपर्क में अचानक आ जाए, तो उसके कान का पर्दा तुरंत फट सकता है और वह हमेशा के लिए बहरा हो सकता है.यह भी पढ़ें: केवल 6 महीने में कैंसर को कैसे दें मात? आज से ही फॉलो करें ये टिप्सकितने डेसीबल पर हो सकती है इंसान की मृत्यु?यह बात सुनने में थोड़ी हैरान करने वाली लग सकती है, लेकिन बहुत ज्यादा तेज आवाज या ध्वनि तरंगें इंसान के लिए अत्यंत हानिकारक हो सकती हैं. वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब आवाज का स्तर 175 से 180 डेसीबल तक पहुंचता है, तो अत्यधिक वायु दबाव के कारण कानों के पर्दों को गंभीर नुकसान पहुंचता है.यदि ध्वनि का स्तर 200 से 210 डेसीबल से ऊपर चला जाए, तो यह स्थिति इंसान के लिए जानलेवा साबित हो सकती है. दरअसल, इतने ऊंचे स्तर पर आवाज केवल एक सामान्य ध्वनि नहीं रह जाती, बल्कि वह एक तीव्र शॉक वेव में बदल जाती है. यह अत्यधिक दबाव वाली लहर श्वसन प्रणाली और शरीर के आंतरिक अंगों पर बहुत भारी आघात करती है, जिससे गंभीर आंतरिक चोटें आ सकती हैं और यह दिल के काम बंद करने का कारण बन सकती है. यही वजह है कि इसे जानलेवा स्तर माना जाता है.यह भी पढ़ें: नेपाल एयरपोर्ट पर क्यों होते हैं भारतीय सुरक्षाकर्मी, कब लागू हुई यह व्यवस्था?