श्यामा मुखर्जी की 125वीं जयंती पर डीयू में राष्ट्रीय संगोष्ठी:विधानसभा अध्यक्ष बोले- 2019 से पहले और बाद के कश्मीर में बदलाव का अध्ययन जरूरी

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दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2019 से पहले और उसके बाद के कश्मीर में आए बदलावों का व्यापक अध्ययन होना चाहिए। तथ्यों के आधार पर दोनों स्थितियों की तुलना की जानी चाहिए, ताकि लोग बदलावों और उनके महत्व को समझ सकें। वह दिल्ली विश्वविद्यालय के श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला महाविद्यालय में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्य अतिथि विजेंद्र गुप्ता ने डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए किए गए संघर्ष को याद किया। उन्होंने कहा कि 2019 में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी करना उस संकल्प की पूर्ति थी, जिसके लिए डॉ. मुखर्जी ने 1952-53 में राजनीतिक आंदोलन किया था। बौद्धिक विरासत और विकसित भारत पर मंथन साहित्य अकादमी और कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन का विषय बौद्धिक विरासत, राष्ट्रीय दृष्टि और विकसित भारत की ओर यात्रा रखा गया है। इसमें डॉ. मुखर्जी के राजनीतिक विचारों, बौद्धिक योगदान और वर्तमान राष्ट्रीय आकांक्षाओं पर चर्चा की जा रही है। कार्यक्रम में संस्कृति मंत्रालय के सचिव प्रो. केजी सुरेश, डीयू के कॉलेजों के डीन प्रो. बलराम पानी और इंडियन हैबिटेट सेंटर के निदेशक डॉ. वरुण गुलाटी मौजूद रहे। इस दौरान विजेंद्र गुप्ता ने द कलेक्टेड स्पीचेज ऑफ द बंगाल टाइगर आशुतोष मुखर्जी पुस्तक की प्रति भेंट कर ऐतिहासिक और शैक्षणिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया।