Epilepsy Symptoms: मिर्गी के साथ कैसे जिएं सामान्य जिंदगी? एक्सपर्ट से जानें सच

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Fear Of Next Seizure Anxiety Management: मिर्गी को आमतौर पर दौरे पड़ने और उसके इलाज से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इस बीमारी के साथ जी रहे लोगों के लिए चुनौती सिर्फ दौरे नहीं होते. अगला दौरा कब आएगा, इसकी अनिश्चितता भी मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकती है. लगातार डर और चिंता के कारण व्यक्ति का आत्मविश्वास कम हो सकता है और वह धीरे-धीरे उन कामों से दूरी बनाने लगता है, जिन्हें वह पहले पसंद करता था. यात्रा करना, अकेले बाहर जाना, किसी कार्यक्रम में शामिल होना या काम से जुड़ी नई जिम्मेदारी लेना भी कई बार चिंता का कारण बन जाता है.एक्सपर्ट ने बताया, मिर्गी में मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरीसीके बिड़ला अस्पताल, दिल्ली के न्यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. के.के. जिंदल के अनुसार, मिर्गी लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है और इसके इलाज को केवल दवाइयों और नियमित जांच तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए. मरीज की भावनात्मक और सामाजिक जिंदगी को समझना भी जरूरी है, ताकि दौरे का डर उसकी पूरी पहचान पर हावी न हो जाए. उन्होंने कहा कि मिर्गी से प्रभावित व्यक्ति के साथ सामान्य और बराबरी का व्यवहार किया जाना चाहिए. खासतौर पर महिलाओं को बीमारी के कारण किसी तरह के सामाजिक भेदभाव या अंधविश्वास का सामना नहीं करना चाहिए.अगला दौरा कब आएगा, यह डर बढ़ा सकता है चिंताअगला दौरा कब आएगा, यह पता न होना मिर्गी के साथ जीने की सबसे बड़ी परेशानियों में से एक हो सकता है. यहां तक कि जिन लोगों के दौरे इलाज से काफी हद तक नियंत्रित रहते हैं, उनके मन में भी यह सवाल बना रह सकता है कि अगली बार ऐसा कब होगा. इसी वजह से कई लोग अकेले यात्रा करने, भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने, दौड़ने या घर से बहुत दूर जाने से डरने लगते हैं.यह चिंता धीरे-धीरे उनके आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती है. कुछ लोग सार्वजनिक जगह पर दौरा पड़ने या ऐसी स्थिति में फंसने के डर से अपनी पसंद की गतिविधियां छोड़ने लगते हैं. इसका असर उनकी सामाजिक जिंदगी पर भी पड़ सकता है. मिर्गी से जूझ रहे कुछ लोग इलाज और सही सपोर्ट के साथ सामान्य जीवन जी लेते हैं, जबकि कुछ लोगों में चिंता, उदासी या लोगों से अलग-थलग रहने की भावना बढ़ सकती है.नौकरी में भी सामने आती हैं कई चुनौतियांकामकाजी जीवन में भी मिर्गी कई तरह की चुनौतियां पैदा कर सकती है. किसी व्यक्ति को ऑफिस में दौरा पड़ने, सहकर्मियों की प्रतिक्रिया या नौकरी में अलग नजर से देखे जाने का डर हो सकता है. इसी वजह से कई लोग अपने साथियों या नियोक्ता को अपनी बीमारी के बारे में बताने से बचते हैं.हालांकि, कुछ काम ऐसे होते हैं जिनमें मिर्गी के कारण वास्तविक सुरक्षा संबंधी सावधानी जरूरी हो सकती है, खासकर ड्राइविंग, ऊंचाई या भारी मशीनरी से जुड़े काम. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति सफल करियर नहीं बना सकता. सही चिकित्सकीय सलाह और काम की जगह पर जरूरी सहयोग के साथ कई लोग लंबे समय तक अपना काम अच्छी तरह करते हैं.नींद और समय पर दवा लेना भी जरूरीनींद की कमी, तनाव और दवा की खुराक छूटना कुछ लोगों में दौरे का खतरा बढ़ा सकता है. इसलिए लंबे समय तक काम करने वाले लोगों के लिए पर्याप्त नींद, समय पर दवा और बीच-बीच में उचित ब्रेक लेना महत्वपूर्ण हो सकता है. अगर सहकर्मियों को इमरजेंसी की स्थिति में क्या करना है, इसकी जानकारी हो और स्वास्थ्य से जुड़ी बातों पर किसी तरह का भेदभाव न हो, तो मरीज ज्यादा सुरक्षित और आत्मविश्वास के साथ काम कर सकता है.रिश्तों पर भी पड़ता है मिर्गी का असरमिर्गी का असर परिवार और रिश्तों पर भी पड़ता है. पार्टनर, माता-पिता और दोस्त अक्सर दौरे के डर से जरूरत से ज्यादा सावधानी बरतने लगते हैं. इससे मरीज को कई बार ऐसा महसूस हो सकता है कि उस पर लगातार नजर रखी जा रही है या उसकी आजादी कम हो रही है. परिवार भी कई बार उसकी परेशानी को गलत समझ सकता है. उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति का लोगों से दूर रहना अरुचि समझ लिया जाता है, जबकि वह वास्तव में सार्वजनिक जगह पर दौरा पड़ने के डर से ऐसा कर रहा हो सकता है. परिवार और दोस्तों के साथ खुलकर बातचीत इस स्थिति को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है.मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करेंमिर्गी की देखभाल में मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. चिंता और डिप्रेशन मिर्गी के साथ दिखाई दे सकते हैं. लगातार उदासी, हर समय चिंता, नींद खराब होना या लोगों से दूरी बनाने जैसी समस्याओं को सामान्य मानकर छोड़ना सही नहीं है. ऐसे लक्षणों के बारे में न्यूरोलॉजिस्ट से बात की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग, थेरेपी या मनोचिकित्सकीय जांच की सलाह ली जा सकती है.डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करेंदौरे लंबे समय से न आने पर भी एंटी-सीजर दवाओं को अपनी मर्जी से बंद या कम नहीं करना चाहिए. दवा कम करने या बंद करने का फैसला व्यक्ति की स्थिति, दौरे के नियंत्रण, जोखिम और पूरी सेहत को ध्यान में रखकर डॉक्टर ही करते हैं.इसे भी पढ़ें: ब्रेस्ट हेल्थ पर डॉक्टरों ने की चर्चा, ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग और समय पर पहचान पर फोकसमिर्गी के साथ सामान्य जिंदगी जीना संभवमिर्गी के साथ बेहतर जिंदगी जीने के लिए सावधानी और सामान्य जीवन के बीच संतुलन जरूरी है. समय पर इलाज, डॉक्टर की सलाह का पालन, पर्याप्त नींद, अपनी स्थिति को समझना और कुछ भरोसेमंद लोगों को इमरजेंसी में मदद करने की जानकारी देना जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है. मिर्गी का निदान किसी व्यक्ति की क्षमता, महत्वाकांक्षा या रिश्तों की सीमा तय नहीं करता. सही इलाज, मानसिक सहयोग और बीमारी को लेकर बेहतर समझ के साथ मिर्गी से पीड़ित लोग करियर, रिश्ते और सामाजिक जीवन को आगे बढ़ा सकते हैं.एक्सपर्ट भी पढ़ें: कैंसर की ये दवाएं होंगी सस्ती, सरकार ने ट्रेड मार्जिन पर लगाई कैप