सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा और उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता एक-दूसरे के विपरीत नहीं हैं, बल्कि दोनों अधिकारों का संरक्षण समान रूप से जरूरी है।