'जब मैं नाना पाटेकर के पैर छूने के लिए झुकता, वे गले लगा लेते', एमपी के शहडोल के अभिनेता संजय श्रीवास्‍तव ने सुनाए अनुभव

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संजय को नाना साहब के साथ करीब दो दिन बिताने, बैठकर बातें करने और साथ खाना खाने का अवसर मिला, हालांकि उनके साथ किसी फिल्म में सीन करने का मौका नहीं मिला। संजय बताते हैं कि नाना पाटेकर पर्दे पर जितने सख्त नजर आते हैं, निजी जीवन में उतने ही सरल, सहज और संवेदनशील इंसान थे।