यह आंकड़े महज मुकदमों की संख्या नहीं, बल्कि उन परिवारों, कारोबारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों की प्रतीक्षा का संकेत हैं, जिनके अधिकारों का फैसला अदालतों से होना है।