विजयादशी संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने स्व की भावना पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को संगठित और बलसंपन्न बनाने के लिए अपने इतिहास, अस्मिता और स्वभाव को समझना जरूरी है।