कभी खुद नशे की गिरफ्त में रहा परविंदर झोटा जब इससे बाहर निकला तो उसने दूसरों को नशे से बचाने की ठान ली। करीब चार-पांच साल पहले उसने नशा तस्करों के खिलाफ आवाज उठानी शुरू की।