गोल्ड जीतकर लौटीं दरोगा अस्मिता को कंधे पर बैठाया:एयरपोर्ट पर फैंस ने नोटों की माला पहनाई, बोलीं- मुझे जीतना ही था

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कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने वाली गाजियाबाद की दरोगा अस्मिता डे ग्लासगो (स्कॉटलैंड) से लौट आई हैं। मंगलवार देर रात अस्मिता फ्लाइट से दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट पहुंचीं। यहां ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत हुआ। नोटों-फूलों की माला पहनाई गई। एक फैन ने उन्हें कंधे पर बैठा लिया। इस पर अस्मिता मुस्कुराते हुए बोलीं- उतार दो, नहीं तो गिर जाऊंगी। अस्मिता ने मीडियाकर्मियों से कहा- मेरा पहले से ही गोल्ड जीतने का टारगेट था। इसलिए मुझे जीतना ही था। बहुत अच्छा लग रहा है कि जूडो में भारत ने पहली बार 2 गोल्ड, 1 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज मेडल जीता। मैं चाहती हूं कि बच्चे इसमें और हिस्सा लें। अस्मिता ने 31 जुलाई को जूडो में कनाडा की हेडी क्वाच को हराया था। गोल्ड जीतने के बाद वह भावुक हो गई थीं। उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े थे। उस वक्त उन्होंने कहा था- जहां से आती हूं, वहां लोग इतने बड़े सपने नहीं देखते। यहां तक पहुंचना आसान नहीं था। नेशनल में गोल्ड जीतने के बाद कॉन्स्टेबल से बनीं दरोगा त्रिपुरा के बेलोनिया की रहने वाली अस्मिता डे ने 28 जुलाई 2023 को गाजियाबाद में स्पोर्ट्स कोटे से कॉन्स्टेबल के पद पर जॉइन किया था। उन्हें पुलिस लाइन में पोस्टिंग मिली। इस दौरान उनकी ट्रेनिंग भोपाल में चलती रही। नेशनल में गोल्ड जीतने के बाद अस्मिता को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया गया। 23 मार्च 2026 को वह दरोगा बन गईं। 800 मीटर दौड़ छोड़ी, जूडो को बनाया करियर अस्मिता डे 800 मीटर दौड़ की एथलीट थीं। जिला स्तरीय ट्रायल के दौरान उनकी रुचि जूडो में बढ़ी। इसके बाद उन्होंने एथलेटिक्स छोड़कर जूडो को अपना खेल बना लिया। अस्मिता ने भोपाल के भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) रीजनल सेंटर में कोच यशपाल सोलंकी की देखरेख में ट्रेनिंग ली। फिलहाल वह केंद्र सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) के डेवलपमेंट ग्रुप का हिस्सा हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। 2 दिन पहले अस्मिता ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपने संघर्षों को साझा किया था। आइए, पढ़ते हैं उनकी पूरी कहानी... ‘पापा का सपोर्ट मुझे यहां तक लेकर आया’ अस्मिता ने कहा था- जब मैं छोटी थी, तब त्रिपुरा के अपने गांव में रहती थी। पापा ही मुझे स्कूल छोड़ने जाते थे। बचपन में दौड़ की तैयारी करती थी और जिला स्तर पर कई मेडल जीते। पापा मेरा हौसला बढ़ाते रहे और कहते थे- और मेहनत करो, आगे बढ़ो। बाद में मैंने जूडो चुना। स्टेट लेवल पर जीत हासिल की तो परिवार में खुशी का माहौल था। पापा और मम्मी ने मुझे हमेशा आगे बढ़ाया। मैं कई बार हार जाती थी, लेकिन पापा कहते थे- हार गई तो कोई बात नहीं, जीत भी होगी। उन्होंने कभी निराश नहीं होने दिया। उनका सपोर्ट ही मुझे यहां तक लेकर आया। ‘पापा के जाने के बाद लगा, सब खत्म हो गया’ अस्मिता ने कहा था- अक्टूबर 2025 में मेरे घुटने में चोट लगी थी। इसके दो महीने बाद दिसंबर 2025 में पापा का ब्रेन स्ट्रोक से निधन हो गया। मैंने कभी नहीं सोचा था कि पापा इस तरह चले जाएंगे। उनके जाने के बाद लगा कि सब कुछ खत्म हो गया। लेकिन दो महीने बाद एशियन गेम्स के ट्रायल हुए। इसमें मैं नेशनल लेवल पर पहले स्थान पर रही। अभी परिवार में मम्मी, मैं, एक भाई और बड़ी बहन हैं। बहन की शादी हो चुकी है। ‘यूपी पुलिस ने मदद की, वेट कंट्रोल के लिए मीठा छोड़ा’ अस्मिता ने कहा था- यूपी पुलिस ने मेरी बहुत मदद की है। अगर सीएम योगी मुझे नौकरी नहीं देते तो मेरे लिए आगे बढ़ना आसान नहीं होता। मुझे नौकरी मिली और फिर प्रमोशन भी हुआ। मैंने सोचा था कि गोल्ड जीतने के बाद प्रमोशन मिलेगा। इसके बाद DSP या तहसीलदार बनने का सपना था। अब भगवान जो देंगे, मुझे मंजूर है। वेट कंट्रोल करने के लिए बहुत कुछ छोड़ना पड़ा। मीठा बंद किया। दिल्ली में कोच ने कहा था कि गोल्ड जीतने के बाद ही मीठा खाना। महज दो चम्मच चावल खाती थी। गेम्स से 10 दिन पहले खाना कम करना पड़ा। पानी भी कम पीती थी और वर्कआउट ज्यादा करना पड़ा। -------------------------- ये खबर भी पढ़िए- यूपी की महिला दरोगा कॉमनवेल्थ में गोल्ड जीतकर रो पड़ीं, कहा-जहां से आती हूं, वहां इतना बड़ा सपना देखना आसान नहीं गाजियाबाद की दरोगा अस्मिता डे ने शुक्रवार को कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने जूडो में कनाडा की खिलाड़ी को मात दी। गोल्ड जीतने के बाद वह भावुक हो गईं। उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। पढ़ें पूरी खबर