सवाल- मेरी उम्र 28 साल है। मैं पिछले 3 साल से रिलेशनशिप में हूं और अब हम शादी के बारे में सोच रहे हैं। लेकिन एक बात मुझे परेशान कर रही है कि मेरे बॉयफ्रेंड के अपने परिवार से रिश्ते अच्छे नहीं हैं। वह इस बारे में बात भी नहीं करता। मैं अपने परिवार के काफी करीब हूं। क्या यह फर्क हमारे रिश्ते पर असर डाल सकता है? मुझे डर लग रहा है कि मैं भी अपनी फैमिली से दूर हो जाऊंगी? क्या मेरे बच्चों पर भी असर पड़ेगा? मैं इस बारे में उससे बात कैसे करूं? मुझे क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट- डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- सबसे पहले तो सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। आपकी फिक्र बता रही है कि आप अपने भविष्य को लेकर संजीदा हैं। चलिए आपकी सिचुएशन समझते हैं और उसके सॉल्यूशन पर बात करते हैं। बचपन तय करता है हमारा स्वभाव आपके मन में उठ रहे डर की वजह जब हम किसी को जीवनसाथी चुनते हैं, तो चाहते हैं कि हमारे परिवार भी आपस में जुड़ें। इसलिए आपके मन में कुछ डर होना स्वाभाविक है। इस डर के पीछे कई कारण छिपे हो सकते हैं, जिन्हें समझना जरूरी है- शुरुआती रिश्तों में प्रेम बेहद जरूरी साइकोलॉजी के मुताबिक, इस दुनिया में मनुष्य का पहला रिश्ता अपने पेरेंट्स से बनता है। यही रिश्तों की बुनियाद होती है। अगर जड़ ही कमजोर हो तो इंसान की प्यार करने, जुड़ने और भरोसा करने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। यह आपके रिश्ते को कैसे प्रभावित कर सकता है? अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ जुड़ते हैं, जो अपनी जड़ों से कटा हुआ है तो वह डिस्कनेक्शन आपसी कम्युनिकेशन में भी झलक सकता है। उनके रिएक्शंस में भी इसके कुछ संकेत दिख सकते हैं। इसे ग्राफिक में देखिए- हमारे रिएक्शंस का मनोविज्ञान मशहूर मनोवैज्ञानिक जॉन गॉटमैन और एस्थर पेरेल के मुताबिक, रिश्तों में होने वाले झगड़े अक्सर ‘उस वक्त से’ जुड़े नहीं होते हैं। ये रिएक्शन कहीं और से आ रहे होते हैं। अगर आपके पार्टनर को लगता है कि कोई उन्हें प्यार नहीं करता तो आपकी थोड़ी सी एब्सेंस भी उन्हें ये एहसास करा सकती है कि आप उन्हें शायद प्यार नहीं करती हैं। कुल मिलाकर ऐसे माहौल में बड़े हुए बच्चों का रिएक्शन असल स्थिति से कहीं बड़ा और आक्रामक होता है। मौजूदा स्थिति पर अतीत का साया जब कोई पुराना दर्द प्रोसेस नहीं होता, तो वह वर्तमान की किसी भी छोटी घटना से 'ट्रिगर' हो जाता है। उदाहरण के लिए, अगर आपने उनका फोन नहीं उठाया, तो उन्हें सिर्फ फोन न उठने का दुख नहीं होगा। उन्हें वह पूरा बचपन याद आ जाएगा, जब उन्हें 'इग्नोर' किया जाता था। इस समय एडल्ट व्यक्ति नहीं रो रहा, वह बच्चा रो रहा है, जिसका कभी ख्याल नहीं रखा गया। जिसे वह अनकंडीशनल मोहब्बत नहीं मिली। ऐसी मामूली घटनाएं उनके ट्रामा को ट्रिगर कर सकती हैं- बच्चों पर क्या असर पड़ेगा? जब पेरेंट्स अपने परिवार से खुद इमोशनली डिस्कनेक्टेड होते हैं, तो अनजाने में उसका असर बच्चों पर भी पड़ता है। मनोविज्ञान में इसे 'इंटरजनरेशनल ट्रॉमा' कहते हैं। यानी एक पीढ़ी का अनसुलझा दर्द अगली पीढ़ी में ट्रांसफर हो जाता है। अगर पिता के मन में परिवार को लेकर कड़वाहट है, तो संभव है कि वह अपने बच्चे को भी 'जुड़ाव' और 'भरोसे' के बुनियादी सबक न दे पाए। पिता का छोटी बातों पर 'आउट ऑफ प्रपोर्शन' रिएक्शन देना बच्चे के मन में डर पैदा कर सकता है, जिससे वे अपनी भावनाएं छिपाने लगते हैं। इसके ये असर हो सकते हैं- बच्चों को इस मुश्किल से बचाएं अगर पेरेंट्स ने कुछ झेला है तो जरूरी नहीं है कि वही ट्रॉमा बच्चों पर भी ट्रांसफर हो। उन्हें इससे बचाने के लिए कुछ ठोस कदम उठाने होंगे- आपको अब क्या करना चाहिए? ऑब्जर्व करें: थेरेपी का सुझाव: अगर उनका गुस्सा कंट्रोल से बाहर है, तो उन्हें प्रोफेशनल काउंसलिंग या थेरेपी के लिए मनाएं। उन्हें समझाएं कि यह उनके पुराने घावों को भरने के लिए है। बाउंड्री तय करें: स्पष्ट करें कि आप अपनी फैमिली से जुड़ी रहेंगी। उन्हें यह भरोसा दिलाएं कि आपके परिवार के करीब होने का मतलब उनसे दूर होना नहीं है। अंतिम सलाह आपका डर गलत नहीं है, लेकिन प्यार में बदलाव लाने की ताकत होती है। अगर पार्टनर अपनी कमियों को स्वीकार करने और उन पर काम करने को तैयार है, तो आप एक स्वस्थ भविष्य बना सकते हैं। अपने स्टैंड पर कायम रहें और धीरे-धीरे उन्हें खुशहाल रिश्तों की अहमियत समझाएं। ………………ये खबर भी पढ़िएरिलेशनशिप एडवाइज- गर्लफ्रेंड कभी प्यार जताए, कभी गायब हो जाए: कभी बहुत बातें तो कभी मैसेज का जवाब भी नहीं, क्या ये नॉर्मल है रिलेशनशिप की शुरुआत में उतार-चढ़ाव आना सामान्य है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति का व्यवहार लगातार ऐसा ही बना हुआ है तो इसे मनोविज्ञान में ‘हॉट-एंड-कोल्ड बिहेवियर’ कहा जाता है। आगे पढ़िए...