मॉब लिंचिंग यानी भीड़ द्वारा हिंसा के शिकार हुए पीड़ितों को न सिर्फ़ गहरे शारीरिक और मानसिक ज़ख़्म झेलने पड़ते हैं बल्कि ऐसी घटनाएँ उन्हें आर्थिक रूप से भी तोड़ देती हैं.