पेरेंटिंग- बेटे की हाइट कम है:उम्र के साथ उसमें बढ़ रही शर्मिंदगी, कमरे में बंद रहता है, सोशलाइज नहीं करता, उसे कैसे सपोर्ट करें?

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सवाल- मेरे बेटे की उम्र 17 साल है। उसकी हाइट अपनी उम्र के बाकी लड़कों की तुलना में कम है। हमने हर कोशिश की, डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन उसकी हाइट नहीं बढ़ पाई। हमने अपनी तरफ से इसे नॉर्मलाइज करने की कोशिश की, उसे ऐसी एक्टिविटीज के लिए इनकरेज किया, जहां उसकी हाइट बाधा न बने। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ रही है, वो इस बात को लेकर कॉन्शस होता जा रहा है। दोस्तों के साथ बाहर नहीं जाता, सोशलाइज नहीं होता। हमेशा अपने कमरे में बंद रहता है। हम उसे कैसे समझाएं? एक्सपर्ट: रिद्धि दोषी पटेल, चाइल्ड एंड पेरेंटिंग साइकोलॉजिस्ट, मुंबई जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। कई बच्चे ऐसी कॉम्प्लेक्सिटी से अकेले गुजरते हैं, क्योंकि घर में उनकी भावनाओं को नहीं समझा जाता है। लेकिन आपने उसकी परेशानी को महसूस किया, डॉक्टरों से सलाह ली, उसे अलग-अलग एक्टिविटीज में इनकरेज किया और चीजों को नॉर्मल बनाने की कोशिश की। यह बताता है कि आप सपोर्टिव और अवेयर हैं। बच्चों में हाइट को लेकर कॉम्प्लेक्सिटी के कई कारण हो सकते हैं। ग्राफिक देखिए- हाइट कॉम्प्लेक्स का बच्चे पर क्या असर होता है? जब बच्चा दूसरों से अपनी तुलना करता है तो धीरे-धीरे उसका फोकस अपनी खूबियों से हटकर सिर्फ अपनी कमियों पर टिक जाता है। शुरुआत में यह सिर्फ शर्म या झिझक तक सीमित लग सकता है। ऐसा बार-बार होने पर बच्चे का आत्मविश्वास, व्यवहार और सोशल लाइफ सब प्रभावित होने लगता है। अगर समय रहते इमोशनल सपोर्ट न मिले तो यह कॉम्प्लेक्सिटी उसकी सेल्फ-इमेज पर गहरा असर डाल सकती है। ग्राफिक में हाइट कॉम्प्लेक्स का बच्चे पर असर देखिए- आइए अब समाधान पर बात करते हैं- कमी की बजाय खूबियाें पर फोकस करें यहां एक और जरूरी बात समझनी होगी कि दुनिया में सिर्फ हाइट ही ऐसा कारण नहीं है, जिसकी वजह से लोग कॉम्प्लेक्सिटी महसूस करते हैं। हर इंसान के जीवन में कोई-न-कोई कमी होती है। जीवन में सभी को सबकुछ कभी नहीं मिलता। लेकिन हम अगर सिर्फ उसी चीज पर फोकस करते रहें, जो हमारे पास नहीं है, तो धीरे-धीरे अच्छाइयां दिखनी बंद हो जाएंगी। इसलिए हमें कमी की बजाय अपनी अच्छाइयों पर फोकस करना चाहिए। बच्चे को इस बारे में आसपास के उदाहरणों से समझाएं। जैसेकि- जीवन की सच्चाई से रूबरू कराएं बच्चे को बताएं कि हर किसी के जीवन में कोई-न-कोई कमी रहती है। उसे बताएं कि- “हो सकता है तुम्हारी हाइट थोड़ी कम हो, लेकिन तुम्हारे हाथ-पैर सही हैं, तुम सोच सकते हो, सीख सकते हो, अपने सपने पूरे कर सकते हो। क्या तुमने कभी सोचा है- दुनिया में बहुत लोग ऐसी चीजों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जो तुम्हारे पास सहज रूप से मौजूद हैं।” यह बातें बच्चे को गिल्ट महसूस कराने के लिए नहीं, बल्कि उसके भीतर कृतज्ञता और संतुलन लाने के लिए होनी चाहिए। कमजोरियों से लड़कर सफल हुए लोगों का उदाहरण दें आप अपने बेटे को यह भी समझा सकते हैं कि दुनिया में बहुत सारे सफल लोग ऐसे रहे हैं, जिनकी हाइट बहुत ज्यादा नहीं थी। लेकिन उन्होंने टैलेंट और आत्मविश्वास के दम अपनी पहचान बनाई। उदाहरण के लिए, स्पोर्ट्स के लिहाज से सचिन तेंदुलकर (5 फीट 5 इंच) और सुनील गावस्कर (5 फीट 4 इंच) जैसे नाम शामिल हैं। क्रिकेट जगत में इतनी लंबाई ‘कम’ मानी जाती है। इसके बावजूद इन्होंने अपनी लंबाई को करियर में बाधा नहीं बनने दिया। बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए ग्राफिक में दी गई कुछ बातों का ध्यान रखें- पेरेंट्स क्या गलतियां करते हैं? हाइट कॉम्प्लेक्सिटी से परेशान बच्चे के साथ पेरेंट्स जाने-अनजाने में कुछ गलतियां करते हैं, जो उनके आत्मविश्वास पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। इसलिए पेरेंट्स को कुछ गलतियों से बचना चाहिए- अगर आपको लगे कि- तो किसी साइकोलॉजिस्ट की मदद लेने में बिल्कुल संकोच न करें। कई बार बच्चे घरवालों से ज्यादा आसानी से किसी न्यूट्रल व्यक्ति के सामने खुल पाते हैं। अंत में यही कहूंगी कि आपका बेटा एक भावनात्मक संघर्ष से गुजर रहा है। इस समय उसे यह महसूस कराने की जरूरत है कि उसकी वैल्यू हाइट से तय नहीं होती है। पेरेंट्स का प्यार और सपोर्ट उसे धीरे-धीरे इस हीन भावना से बाहर आने में सबसे ज्यादा मदद करेगा। ………………ये खबर भी पढ़िएपेरेंटिंग- मेरी गोद ली हुई बेटी 9 साल की है: उसके दोस्तों ने बताया ‘वह एडॉप्टेड है’, तब से वह ढेर सारे सवाल पूछती है, क्या करूं? यह सवाल बहुत से एडोप्टिव पेरेंट्स के मन में आता है। सबसे पहले यह समझें कि आपने जिस बच्ची को अपनाया है, उसके प्रति आपका प्यार और जिम्मेदारी ही असली पेरेंटिंग है। इसलिए खुद को दोषी महसूस न करें। आगे पढ़िए...