सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने तर्क दिया कि यह मामला जनहित का नहीं, बल्कि सेवा अधिकारों का है। कोर्ट ने इस आपत्ति को स्वीकार करते हुए याचिका का पटाक्षेप कर दिया।