कभी चलते समय पैर गलत तरीके से मुड़ जाता है। कभी सीढ़ियां उतरते हुए संतुलन बिगड़ जाता है। कभी सड़क पर पैर गड्ढे में पड़ जाता है और पैर में मोच (स्प्रेन) आ जाती है। कई बार लोग मोच को मामूली चोट समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह लिगामेंट को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। अगर समय पर फर्स्ट एड न मिले तो दर्द और सूजन बढ़ सकती है और ठीक होने में लंबा समय लग सकता है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में मोच को विस्तार से समझेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. आशीष दीवान, सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक्स एंड स्पाइन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- मोच (स्प्रेन) क्या होती है? जवाब- मोच का मतलब- ‘लिगामेंट्स में चोट लगना’ है। आसान शब्दों में इसे ऐसे समझिए– सवाल- मोच और फ्रैक्चर में क्या फर्क है? जवाब- मोच आने पर लिगामेंट डैमेज होते हैं, जबकि फ्रैक्चर में हड्डी टूटती है। दोनों में दर्द और सूजन हो सकती है, लेकिन फ्रैक्चर ज्यादा गंभीर होता है। नीचे ग्राफिक में दोनों का अंतर समझिए- सवाल- पैर में मोच सबसे ज्यादा किस हिस्से में आती है? जवाब- सबसे ज्यादा टखने (एंकल) में मोच आती है। यह आमतौर पर चलते-दौड़ते, सीढ़ियां उतरते या खेलते समय पैर अचानक मुड़ने से होता है। टखने के बाहरी हिस्से के लिगामेंट्स सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इसलिए एंकल स्प्रेन सबसे कॉमन मोच मानी जाती है। सवाल- टखने की मोच ज्यादा कॉमन क्यों होती है? जवाब- टखना पूरे शरीर का वजन संभालता है। चलने-दौड़ने, कूदने व सीढ़ियां चढ़ने-उतरने जैसी एक्टिविटीज में इस पर ज्यादा दबाव पड़ता है। ऐसे में पैर का अचानक मुड़ जाना या संतुलन बिगड़ना टखने के लिगामेंट्स पर ज्यादा दबाव डालता है। इससे यहां मोच का रिस्क बढ़ जाता है। सवाल- क्या हल्की मोच भी गंभीर हो सकती है? जवाब- हां, अगर हल्की मोच को नजरअंदाज किया जाए या पर्याप्त आराम और इलाज न मिले तो यह गंभीर हो सकती है। बार-बार मोच आने से- सवाल- मोच आने के तुरंत बाद क्या करें? जवाब- मोच आने के तुरंत बाद ये करें– 1. आराम दें जिस हिस्से में मोच आई है, उस पर वजन डालने या उसे ज्यादा हिलाने-डुलाने से बचें। 2. बर्फ लगाएं 15-20 मिनट तक बर्फ की सिकाई करें। इस प्रोसेस को हर 2-3 घंटे में दोहराएं। बर्फ को सीधे स्किन पर न लगाएं। 3. दबाव दें इलास्टिक बैंडेज को हल्का दबाव देकर बांधें। इससे सूजन कम करने में मदद मिलती है। 4. ऊंचाई पर रखें मोच वाले अंग को हार्ट लेवल से ऊपर रखें, ताकि सूजन कम हो। 5. दर्द होने पर आराम करें दर्द को नजरअंदाज करके चलना-फिरना जारी न रखें। 6. पहले 48 घंटे गर्म सिकाई न करें गर्म पानी, हीट पैड या मालिश से शुरुआती सूजन बढ़ सकती है। सवाल- RICE थेरेपी क्या है, जिसे डॉक्टर मोच आने पर रेकमंड करते हैं? जवाब- RICE थेरेपी का मतलब है– रेस्ट, आइस, कंप्रेशन और एलिवेशन। आसान शब्दों में कहें तो आराम करना, बर्फ लगाना, दबाव डालना और चोट को ऊंचा उठाकर रखना। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखें- सवाल- मोच आने पर क्या नहीं करना चाहिए? जवाब- मोच आने के बाद शुरुआती 24-48 घंटे बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान सही देखभाल करने से दर्द और सूजन कम हो सकती है, जबकि कुछ गलतियां चोट को बढ़ा सकती हैं। ग्राफिक में सभी गलतियां देखिए- सवाल- कैसे जानें कि मोच हल्की है या गंभीर? जवाब- मोच की गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि लिगामेंट्स को कितना नुकसान पहुंचा है। हल्की मोच में दर्द और सूजन कम होती है, जबकि गंभीर मोच में लिगामेंट्स ज्यादा डैमेज हो सकते हैं और चलना-फिरना मुश्किल हो सकता है। इसे ग्राफिक से समझिए- सवाल- किन लक्षणों में तुरंत ऑर्थोपेडिक्स को दिखाना चाहिए? जवाब- अगर दर्द बहुत ज्यादा हो, पैर पर वजन न डाल पा रहे हों या फ्रैक्चर का शक हो तो तुरंत ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से कंसल्ट करें। सभी संकेत ग्राफिक में देखिए- मोच से जुड़े कॉमन सवाल-जवाब सवाल- क्या मोच आने पर तुरंत चलना बंद कर देना चाहिए? जवाब- हां, मोच आने पर प्रभावित पैर पर वजन डालने और ज्यादा चलने-फिरने से बचना चाहिए। इससे लिगामेंट्स को ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है। दर्द और सूजन बढ़ सकती है। इसलिए शुरुआती कुछ समय तक पैर को आराम देना जरूरी है। सवाल- क्या पैर को हिलाना ठीक है? जवाब- मोच के तुरंत बाद पैर को ज्यादा हिलाने-डुलाने से बचना चाहिए। हालांकि दर्द और सूजन कम होने के बाद डॉक्टर की सलाह से हल्का मूवमेंट फायदेमंद हो सकता है। इससे जोड़ों की अकड़न कम होती है और रिकवरी बेहतर होती है। सवाल- क्या पैर को ऊपर उठाकर रखने से फायदा होता है? जवाब- हां, लेटते समय पैर को सीने से ऊपर रखने से चोट वाली जगह पर ब्लड और फ्लूइड का जमाव कम होता है। इससे सूजन, दर्द कम करने और बेहतर रिकवरी में मदद मिलती है। यही वजह है कि RICE थेरेपी में एलिवेशन को महत्वपूर्ण माना जाता है। सवाल- मोच में बर्फ कितनी देर तक लगानी चाहिए? जवाब- मोच आने के बाद चोट वाली जगह पर 15-20 मिनट तक बर्फ की सिकाई करनी चाहिए। जरूरत पर इसे हर 2-3 घंटे के गैप पर कर सकते हैं। शुरुआती 24 से 48 घंटे महत्वपूर्ण होते हैं। इस बीच लगातार बर्फ की सिकाई करनी चाहिए। इससे दर्द और सूजन कम करने में मदद मिलती है। सवाल- बर्फ सीधे स्किन पर लगानी चाहिए या कपड़े में बांधकर? जवाब- बर्फ कभी भी सीधे स्किन पर न लगाएं। उसे हमेशा कपड़े या तौलिये में लपेटकर लगाएं। सीधे लगाने से स्किन को नुकसान हो सकता है। ठंड से जलन या फ्रॉस्टबाइट (ठंड से स्किन के नीचे के टिश्यू का जमना) जैसी समस्या हो सकती है। सवाल- क्या मोच वाली जगह पर मसाज करनी चाहिए? जवाब- नहीं, शुरुआती 24-48 घंटों में मसाज करने से दर्द और सूजन बढ़ सकती है। दर्द और सूजन कम होने के बाद डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह पर मसाज कर सकते हैं। सवाल- मोच का दर्द कम करने के लिए क्या करें? जवाब- मोच के दर्द को कम करने के लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। सवाल- कौन सी OTC दवाएं ली जा सकती हैं? जवाब- हल्के और मीडियम दर्द में ओवर-द-काउंटर पेनकिलर मेडिसिन ली जा सकती है। कुछ मामलों में एंटी-इन्फ्लेमेटरी दवाएं भी दी जाती हैं, लेकिन इन्हें डॉक्टर की सलाह बिना न लें। सवाल- मोच की सूजन कितने दिनों तक रह सकती है? जवाब- हल्की मोच में सूजन 3-7 दिनों तक रह सकती है। मीडियम या गंभीर मोच में सूजन पूरी तरह ठीक होने में कई हफ्ते लग सकते हैं। सवाल- क्या मोच का नीला या काला पड़ना सामान्य है? जवाब- हां, मोच के बाद चोट वाली जगह का नीला या काला पड़ना सामान्य है। यह स्किन के नीचे छोटी ब्लड वेसल्स के डैमेज होने के कारण होता है। ये आमतौर पर कुछ दिनों में धीरे-धीरे ठीक हो जाता है। सवाल- क्या पुरानी मोच दोबारा परेशान कर सकती है? जवाब- हां, अगर मोच पूरी तरह ठीक होने से पहले सामान्य एक्टिविटीज शुरू कर दी जाएं तो दोबारा परेशानी हो सकती है। इससे टखने में कमजोरी, अस्थिरता और बार-बार मोच आने का रिस्क बढ़ जाता है। ……………………. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- हेल्थ एप्स भरोसेमंद नहीं: इन कामों के लिए यूज न करें, इसके डेटा को सच न मानें, यूज करते हुए 12 सावधानियां बरतें पिछले कुछ सालों में भारत में हेल्थ एप्स के इस्तेमाल में लगभग 249% की बढ़ोत्तरी हुई है। यानी लोग हेल्थ सॉल्यूशन के लिए एप्स का सहारा ले रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हेल्थ एप्स कैसे काम करते हैं और इन पर भरोसा करना कितना सही है। पूरी खबर पढ़िए…