हरियाणा ने दिल्ली में उठाया किशाऊ डैम पानी विवाद:केंद्रीय मंत्री ने 5 राज्यों की बुलाई बैठक; फरीदाबाद-पलवल को गंगा कैनाल से मिलेगा पानी

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केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में नई दिल्ली स्थित उनके निवास स्थान पर बुधवार को हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी और राजस्थान के सीएम भजन लाल शर्मा के बीच बैठक हुई। इस दौरान दोनों राज्यों के आला अधिकारी भी शामिल हुए। बैठक में हरियाणा के सीएम नायब सैनी ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष कुछ पड़ोसी राज्यों से जुड़े साझा मुद्दों और हरियाणा से जुड़े पानी के विषयों को रखा। उन्होंने किशाऊ बांध परियोजना में तेजी लाने और जल्द से जल्द पड़ोसी राज्यों के बीच इस परियोजना को लेकर एमओयू किए जाने का विषय रखा। इस पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने अपने सचिव को निर्देश दिए कि जल्द से जल्द किशाऊ बांध को लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के अधिकारियों की बैठक आयोजित की जाए और बांध से जुड़े जल बंटवारे और बिजली को लेकर फैसला किया जाए। 5 राज्यों के सीएम की होगी बैठक इसके उपरांत इसे लेकर शीघ्र ही मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई जाए और एमओयू से जुड़े काम को पूरा किया जाए। सीएम नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह बांध परियोजना सभी प्रदेशों के लिए महत्वपूर्ण है। इससे बड़ी मात्रा में पानी मिलेगा, जो सभी के लिए बेहद आवश्यक है। इससे सभी राज्यों को लाभ मिलेगा। इस विषय पर केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने अपने विभाग के अधिकारियों को जल्द से जल्द इस विषय पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। फरीदाबाद-पलवल के लिए अपर गंगा कैनाल से पानी लेने पर चर्चा बैठक में सीएम नायब सिंह सैनी ने फरीदाबाद और पलवल के लिए उत्तर प्रदेश से अपर गंगा कैनाल से पानी लेने को लेकर चर्चा की। उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मार्गदर्शन कर जल्द से जल्द इस योजना को आगे बढ़ाने का अनुरोध भी किया। बैठक में मुनक कैनाल से गुरुग्राम और नूंह जिले तक पानी की सप्लाई पहुंचाने से जुड़ी 2000 करोड़ की परियोजना की भी केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से चर्चा की। इस संबंध में केंद्रीय मंत्री ने इस परियोजना को लेकर जो भी संभव सहायता होगी, उसे देने का आश्वासन दिया। बैठक में आरआरटीएस परियोजना को लेकर राजस्थान से जुड़े विषय पर चर्चा भी हुई। नजफगढ़ में जलभराव को लेकर भी चर्चा की गई। पानी की किल्लत पर भी चर्चा बैठक में खासतौर पर साउथ हरियाणा में पानी की कमी और राजस्थान के सूखाग्रस्त जिलों को पानी पहुंचाने की योजना पर भी बात हुई। वहीं इस बैठक में गर्मियों के इस मौसम को देखते हुए पैदा होने वाले पानी की किल्लत को लेकर भी चर्चा की गई। वहीं बीबीएमबी से मिलने वाले पानी को लेकर भी दोनों राज्यों की बात को लेकर चर्चा हुई। बीते साल पंजाब ने हरियाणा और राजस्थान को अतिरिक्त पानी देने से इनकार कर दिया था, जिससे इस मुद्दे को लेकर सियासत भी खूब हुई थी। एक साल पहले हुई थी बैठक इससे पहले केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी और राजस्थान के सीएम भजन लाल शर्मा की संयुक्त बैठक हुई थी। बैठक में हथिनी कुंड से यमुना नदी का सरप्लस पानी राजस्थान को उपलब्ध कराने के मुद्दे पर चर्चा की गई थी। बैठक के बाद सीएम नायब सिंह सैनी ने बताया था कि इस बैठक में यमुना नदी का सरप्लस पानी राजस्थान को उपलब्ध कराने के लिए विस्तृत चर्चा हुई। इस विषय पर जल्द ही हरियाणा और राजस्थान के अधिकारियों की एक संयुक्त टास्क फोर्स बनाई जाएगी, ताकि आने वाले दिनों में इस योजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा सके। केंद्र भेज चुका विशेषज्ञ दल सीएम सैनी ने बताया कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की पहल पर दोनों राज्यों के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए थे। बैठक में उन्होंने हरियाणा के विभिन्न क्षेत्रों में सेम की समस्या के समाधान के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय से तकनीकी सहयोग की मांग भी की गई थी। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने इस संबंध में जल्द ही एक तकनीकी दल राज्य में भेजने का आश्वासन दिया। पूर्व CM खट्टर ने की थी पहल पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर ने अपने कार्यकाल के दौरान करीब 11 महीने पहले इस पर सहमति जताई थी। तब तत्कालीन केंद्रीय जल शक्ति मंत्री भैरो सिंह शेखावत की मध्यस्थता में एक बैठक हुई थी। इस बैठक में हरियाणा ने तय किया था कि हथिनी कुंड से जरूरत के मुताबिक पानी लेने के बाद जो अतिरिक्त पानी बचेगा, उसे राजस्थान को दिया जाएगा। यह पानी हरियाणा के सीमावर्ती इलाकों में सप्लाई किया जाएगा। बैठक में राजस्थान के सीएम भजन लाल शर्मा भी मौजूद थे। दोनों राज्यों के बीच तय हुआ था कि हरियाणा बरसात के मौसम में यमुना का अतिरिक्त पानी राजस्थान को देगा। यमुना का यह पानी दक्षिण हरियाणा से राजस्थान को दिया जाएगा और राजस्थान इस पानी को स्टोर करेगा, ताकि पीने के लिए इस्तेमाल किया जा सके। दोनों राज्यों के बीच का समझौता हरियाणा पहले हुए समझौते और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार दिल्ली को यमुना से मिलने वाला पानी देता रहेगा। इसमें कोई कटौती नहीं की जाएगी। राजस्थान में पानी की कमी है, इसलिए हरियाणा ने राजस्थान के साथ यह समझौता किया था। केंद्र के बाद हरियाणा और अब राजस्थान में भाजपा की सरकार बनने के बाद वहां के सीएम भजनलाल ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के माध्यम से यह प्रस्ताव रखा था। राजस्थान के तीन जिलों को होगा फायदा हरियाणा ने इस प्रस्ताव को इसलिए स्वीकार किया है क्योंकि इससे हरियाणा को नुकसान नहीं बल्कि फायदा है। दोनों राज्यों के अधिकारी इस बात की कार्ययोजना तैयार करेंगे कि बरसात के मौसम में कितना अतिरिक्त पानी है और उसे किस माध्यम से राजस्थान भेजा जाएगा। सीएम ने कहा कि पश्चिमी यमुना की क्षमता को पूरी तरह से संरक्षित किया जाएगा। गजेंद्र शेखावत ने कहा था कि इस समझौते से राजस्थान के सीकर, झुंझुनू और चूरू को फायदा होगा जहां पानी की उपलब्धता नहीं है राजस्थान 20 साल से दे रहा है सुझाव हथिनी कुंड बैराज की जल संग्रहण क्षमता से अधिक पानी राजस्थान को दिया जाएगा। यह सुझाव राजस्थान की ओर से पिछले 20 साल से दिया जा रहा था, लेकिन इस पर किसी ने पहल नहीं की। अब उन्हें खुशी है कि राजस्थान और हरियाणा के सीएम ने इस पर काम करना शुरू कर दिया है। अब एमओयू के बाद हथिनी कुंड बैराज से 4 पाइपलाइन निकाली जाएंगी, जिनमें से 3 लाइनें राजस्थान और एक पाइपलाइन हरियाणा के लिए होगी।