छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि जांच एजेंसियां किसी भी व्यक्ति की सहमति के बिना जबरन नार्को-एनालिसिस, पॉलीग्राफ या ब्रेन मैपिंग टेस्ट नहीं कर सकतीं।