राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ही दान की संपत्ति का हिसाब किताब रखता है और इसमें ज़्यादातर सदस्य आरएसएस और वीएचपी के हैं. सवाल ये भी पूछा जा रहा है कि क्या मुख्यमंत्री योगी को इसके बारे में जानकारी नहीं थी?