कार्यक्रम को ''''मप्र की उम्मीदों का शहर इंदौर'''' नाम दिया गया था। आयोजन को राजनीतिक हलकों में मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र में लगाए गए आरोपों के जवाब के रूप में देखा जा रहा था। कार्यक्रम निरस्त करने के पीछे तीन जुलाई को मुख्यमंत्री की उपलब्धता नहीं होने को वजह बताया जा रहा है।