कश्मीर की झीलें, खासकर डल और वुलर, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, अनियोजित निर्माण और अतिक्रमण के कारण तेजी से सिकुड़ रही हैं। सीवेज और कचरे से पानी दूषित हो रहा है और खरपतवार बढ़ रही है। कई झीलें पहले ही खत्म हो चुकी हैं, जिससे पर्यावरण, पर्यटन और आजीविका पर गंभीर असर पड़ रहा है।