आचार्य पुष्पदंत सागर का मिलन शिष्य अंतर्मना प्रसन्न सागर महाराज से हुआ। शिष्य ने संघ के साथ तीन परिक्रमा लगाकर अपने गुरु के चरण वंदन कर उनका आशीष लिया। दोनों संतों ने एक-दूसरे को गले लगाया। गले लगाते हुए शिष्य प्रसन्न सागर की आंखें नम हो गई। ये दृश्य देख उपस्थित जनसमुदाय भाव विभोर हो गया