ग्राम दत्तीगरा निवासी प्रहलाद सिंह राठौर और उनके दो भाइयों ने मिलकर करीब साढ़े दस बीघा भूमि में सोयाबीन की बोवनी की थी। उन्होंने दो बोतल 'वरदान' नामक दवा का उपयोग किया था। प्रत्येक बोतल की कीमत करीब 700 रुपये थी। उनका आरोप है कि दवा मिलाने के बाद लगभग 10 बीघा क्षेत्र में सोयाबीन के बीज अंकुरित ही नहीं हुए।