भास्कर अपडेट्स:चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज कंटेंट विवाद पर Meta की सफाई, बोला- बच्चों के शोषण के लिए हमारे एप्स पर कोई जगह नहीं

Wait 5 sec.

इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) से जुड़े विज्ञापनों के मामले में केंद्र सरकार के नोटिस के बाद Meta ने अपना पक्ष रखा है। कंपनी ने कहा कि बच्चों का यौन शोषण एक भयानक अपराध है और उसकी किसी भी एप पर ऐसे कंटेंट के लिए कोई जगह नहीं है। Meta ने मंगलवार को एक विस्तृत ब्लॉग जारी कर बताया कि वह फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर ऐसे कंटेंट को रोकने के लिए AI बेस्ड सिस्टम, विज्ञापन का रिव्यू और बड़े पैमाने पर कार्रवाई कर रही है। Meta ने कहा कि यह कहना पूरी तरह गलत है कि कंपनी जानबूझकर बच्चों से जुड़े अनुचित विज्ञापन लोगों को दिखाती है। पिछले साल उसने संदिग्ध गतिविधियों में शामिल 40 लाख से ज्यादा अकाउंट हटाए थे। आज की बाकी बड़ी खबरें… असली TMC विवाद- चुनाव आयोग ने रितब्रत बनर्जी गुट को 10 जुलाई तक जवाब दाखिल करने कहा तृणमूल कांग्रेस (TMC) में नेतृत्व को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने रितब्रत बनर्जी गुट को जवाब दाखिल करने के लिए 10 जुलाई तक का समय दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, रितब्रत गुट ने अपना पक्ष रखने के लिए एक सप्ताह का और समय मांगा था, जिसे आयोग ने स्वीकार कर लिया। इससे पहले चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को 6 जुलाई शाम 5:30 बजे तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। हालांकि, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट ने तय समय के भीतर अपना विस्तृत जवाब आयोग को सौंप दिया, जबकि रितब्रत गुट ने समय बढ़ाने की मांग की। गुजरात हाई कोर्ट का मामला- ‘काजू कतली पर फॉइल नुकसानदेह का प्रमाण नहीं’ गुजरात हाई कोर्ट ने कहा है कि काजू कतली पर लगी एल्युमिनियम फॉयल को सेहत के लिए नुकसानदेह बताने का कोई सबूत रिकॉर्ड पर नहीं है। कोर्ट ने मिठाई दुकान मालिकों को मिलावट के केस में बरी करने के फैसले को सही ठहराया। बेंच ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने तथ्यों और कानून को ठीक से नहीं पढ़ा। ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को सजा दी थी, जिसे अपीलीय कोर्ट ने पलटते हुए आरोपियों को बरी कर दिया था। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए अपीलीय कोर्ट का फैसला बरकरार रखा।