घायल होने के बाद युद्ध क्षेत्र से बाहर जान गंवाने वाले हज़ारों पंजाबी सैनिकों के नाम पहले रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किए थे. अब उनके वंशजों को पता चल रहा है कि ऐसे लोगों ने विश्व युद्ध में हिस्सा लिया था और मारे गए थे.