हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा अपने अंशदान में वृद्धि किए जाने का लाभ कर्मियों तक पहुंचना चाहिए था, न कि राज्य सरकार अपने हिस्से में कटौती कर उनका वास्तविक मानदेय कम कर दे।