क्या ख़ामेनेई के जनाज़े में उमड़ी भीड़ दुनिया को दिखाकर ईरान ये साबित करना चाहता है कि चार महीनों तक अमेरिकी और इसराइली हमले झेलने के बाद भी उसकी ताक़त कम नहीं हुई है? क्या वो ये दिखाना चाहता है कि ख़ामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए ईरानी जनता आतुर है?