Cancer Survivors: अब तक कैंसर के इलाज का मतलब सिर्फ मरीज को बचाना माना जाता था, लेकिन अब यह सोच बदल रही है. एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आने वाले समय में दुनिया भर में कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है. लेकिन इसके साथ एक और बड़ी समस्या भी है, जिसे इन आकड़ों में गिना नहीं जाता है, वह है कैंसर से बच चुके मरीजों की बढ़ती संख्या, जिन्हें लंबे समय तक मेडिकल और मानसिक सहारे की जरूरत होती है. डॉ के अनुसार, जल्दी बीमारी का पता लगने, बेहतर इलाज के तरीकों और सर्जरी में सुधार की वजह से अब मरीज पहले से कहीं ज्यादा लंबे समय तक जिंदा रह रहे हैं, लेकिन इससे एक नई स्वास्थ्य चुनौती भी खड़ी हो गई है.इलाज खत्म होना यात्रा का अंत नहींडॉक्टर बताते हैं कि ज्यादातर मरीज यह मान लेते हैं कि इलाज पूरा होते ही उनकी कैंसर से जुड़ी परेशानी खत्म हो जाती है, लेकिन असल में यहीं से एक नया दौर शुरू होता है. उनके मुताबिक, कैंसर या उसके इलाज के साइड इफेक्ट सालों तक बने रहते हैं. जैसे मरीजों को थकान, नसों में परेशानी, दिल से जुड़ी बीमारियां, हार्मोन में बदलाव, बच्चे पैदा करने से जुड़ी दिक्कतें और कैंसर के दोबारा होने का खतरा. इसलिए ऐसे मरीजों को सलाह दी जाती है कि वे समय-समय पर डॉक्टर से जांच करवाते रहें. सबसे खतरनाक बात तो ये है की कई मरीज तो बीमारी के दोबारा लौटने की चिंता, डिप्रेशन, ध्यान लगाने में परेशानी, जैसी चीजों से जूझते हैं. यह भी पढ़ेंः Swiggy पर FSSAI का बड़ा एक्शन, ग्राहकों की शिकायतों के बाद जारी किए 9 नोटिससर्वाइवर्स की देखभाल पर देना होगा ज्यादा ध्यानविशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर से बच चुके मरीजों नियमित जांच, फिजियोथेरेपी, सही खानपान, मानसिक सेहत के लिए सहारा, दर्द से राहत और मरीजों को सही जानकारी होना बहुत जरूरी है. इससे उनका आत्मविश्वास बड़ता है. उनके मुताबिक, अब स्वास्थ्य व्यवस्था को सिर्फ कैंसर का इलाज करने तक सीमित न रहकर, ठीक हो चुके मरीजों की देखभाल पर भी उतना ही ध्यान देना होगा. WHO की रिपोर्ट भी इसी बात को दोहराती है. रिपोर्ट के मुताबिक कैंसर सिर्फ शरीर को ही नहीं, बल्कि जिंदगी के कई और पहलुओं को भी प्रभावित करता है. इसलिए जरूरी है की इन बातों का भी पूरा ध्यान रखा जाए. यह भी पढ़ेंः Cancer Drug kerala Case : दवा के इंतजार में कोर्ट केस ही लड़ती रही कैंसर पेशेंट, 57 बार टली सुनवाई और हो गई मौत