कमर दर्द की शिकायत बहुत कॉमन है। ज्यादातर लोग इसे थकान, गलत पोस्चर या बढ़ती उम्र का असर मान लेते हैं। लेकिन अगर यह दर्द बार-बार हो रहा है और कई महीनों से बना हुआ है तो यह एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस (AS) हो सकता है। यह एक क्रॉनिक इंफ्लेमेटरी बीमारी है। इसमें रीढ़ और जोड़ों में लंबे समय तक सूजन बनी रहती है, जिससे दर्द और जकड़न की समस्या होती है। हेल्थकेयर डेटा और एनालिटिक्स फर्म ‘ग्लोबल डेटा’ के अनुसार, भारत में एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के करीब 16.5 लाख मरीज हैं। यह संख्या हर साल लगभग 2.95% की दर से बढ़ रही है। वहीं, जागरूकता की कमी के कारण कई मरीजों का समय पर सही डायग्नोसिस नहीं हो पाता। इसीलिए आज 'फिजिकल हेल्थ' में एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. हेमंत बंसल, सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम सवाल- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस क्या है? क्या ये एक तरह का अर्थराइटिस है? जवाब- हां, एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस (AS) एक तरह का इंफ्लेमेटरी अर्थराइटिस है। इसे एक्सियल स्पॉन्डायलोआर्थराइटिस (Axial Spondyloarthritis) भी कहते हैं। पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस क्यों होता है? जवाब- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस होने की वजह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह तब होता है, जब इम्यून सिस्टम शरीर के ही जोड़ों और रीढ़ पर हमला करने लगता है। कुछ जीन, खासकर HLA-B27, इस बीमारी का रिस्क बढ़ा सकते हैं। यही वजह है कि जिन लोगों के परिवार में यह बीमारी रही है, उनमें इसका जोखिम अपेक्षाकृत ज्यादा होता है। सवाल- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के लक्षण क्या हैं? जवाब-एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस का सबसे कॉमन लक्षण कमर के निचले हिस्से और कूल्हों में लगातार दर्द व अकड़न है। यह परेशानी आमतौर पर सुबह उठने पर या लंबे समय तक बैठने के बाद ज्यादा महसूस होती है। सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस और सामान्य कमर दर्द में अंतर होता है? जवाब- हां, एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस का दर्द सामान्य कमर दर्द से अलग होता है। ग्राफिक से दोनों के बीच का फर्क समझिए- सवाल- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं? जवाब- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है। यह बीमारी अक्सर किशोरावस्था के आखिर या 20-30 साल की उम्र में शुरू होती है। ग्राफिक में सभी रिस्क फैक्टर्स देखिए- सवाल- अगर एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस का ट्रीटमेंट न हो तो इससे और किन बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है? जवाब- यह कई गंभीर कॉम्प्लिकेशन्स का कारण बन सकता है, जैसेकि- सवाल- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस डायग्नोज कैसे होता है? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस का इलाज कैसे किया जाता है? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस में एक्सरसाइज फायदेमंद है? जवाब- हां, सही तरह की एक्सरसाइज करने से दर्द और जकड़न कम करने, रीढ़ की लचक बनाए रखने, शरीर का मूवमेंट बेहतर करने और पोस्चर सुधारने में मदद मिलती है। इसमें ये एक्सरसाइज शामिल हैं- ध्यान रहे, किसी भी नई एक्सरसाइज की शुरुआत डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से ही करें। सवाल- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस से कैसे बचें? जवाब- फिलहाल एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस को पूरी तरह रोकने का कोई तरीका नहीं है, क्योंकि इसके सटीक कारण स्पष्ट नहीं हैं। हालांकि, समय पर पहचान और इलाज से बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है। ग्राफिक में बचाव के सभी टिप्स देखिए- समय पर पहचान और सही इलाज से एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के दर्द व जकड़न को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। जागरूकता और लाइफस्टाइल में सुधार इस बीमारी के मैनेजमेंट की सबसे बड़ी कुंजी है। ************** ग्राफिक्स- विपुल शर्मा ……………….. फिजिकल हेल्थ से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- पेट अक्सर खराब रहता है: हो सकता है ग्लूटेन इन्टॉलरेंस, डॉक्टर से जानें इस बीमारी के लक्षण, कारण, इससे कैसे बचें गैस बनना या बार-बार दस्त होना कॉमन डाइजेस्टिव इश्यू हैं। ज्यादातर लोग इन्हें सामान्य अपच या खानपान की गड़बड़ी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर ये समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें या बार-बार होती रहें, तो इसके पीछे ‘ग्लूटेन इन्टॉलरेंस’ एक कारण हो सकता है। पूरी खबर पढ़िए…