मिडिल-ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका ने इलाके में मौजूद अपने दूतावासों और नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने लोगों से ज्यादा सतर्क रहने को कहा है। इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपना कैंप डेविड दौरा एक दिन पहले खत्म कर शनिवार शाम व्हाइट हाउस लौट आए। ट्रम्प की जल्दी वापसी की वजह व्हाइट हाउस ने नहीं बताई है। वहीं, रशिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी B-1B लांसर बॉम्बर ने ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड एयरबेस से फुल आफ्टरबर्नर के साथ उड़ान भरते हुए मिडिल-ईस्ट की तरफ रवाना हुआ है। ईरान के प्रेस TV ने भी उत्तर-पूर्वी सीरिया के अल-हसकाह में खाराब अल-जिर एयरबेस के पास एयर डिफेंस एक्टिविटी की जानकारी दी है। ब्रिटिश एयरबेस से अमेरिकी विमान के रवाना होने का वीडियो… 9 देशों में अमेरिकी नागरिकों को सावधानी की सलाह अमेरिका ने इराक, बहरीन, ओमान, सऊदी अरब, ईरान, कतर, लेबनान, कुवैत और जॉर्डन में रह रहे अपने नागरिकों को सावधान रहने को कहा है। अमेरिका ने कहा कि मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए इन देशों की यात्रा करने वाले अमेरिकियों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। अमेरिकी नागरिकों से कहा गया है कि वे फ्लाइट और एयरपोर्ट से जुड़ी ताजा जानकारी देखते रहें। ईरान ने जंग खत्म करने के लिए 7 शर्तें रखीं ईरान ने चल रही जंग खत्म करने के लिए अमेरिका के सामने 7 शर्तें रखी हैं। ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका ने उसकी मांगें नहीं मानीं तो वह जंग जारी रखने के लिए तैयार है। ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने अल जजीरा से कहा कि कतर ने मध्यस्थ के तौर पर ईरान की शर्तें अमेरिका तक पहुंचा दी हैं। अब ईरान ट्रम्प के जवाब का इंतजार कर रहा है। रेजाई के मुताबिक, ईरान की मांगों में सभी मोर्चों पर युद्ध रोकना, विदेशों में फ्रीज किए गए ईरानी फंड जारी करना और नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना शामिल है। सऊदी बोला- हूतियों ने रियाद पर मिसाइल हमले की कोशिश की सऊदी अरब ने कहा कि हूतियों ने उसकी राजधानी रियाद पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला करने की कोशिश की। सऊदी सेना के मुताबिक, उसने मिसाइलों को रास्ते में ही रोक दिया। हूती प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि संगठन ने सऊदी अरब पर कई बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ ड्रोन भी भेजे। उनके मुताबिक, रियाद और सऊदी तेल कंपनी अरामको की यानबू स्थित सुविधाओं को निशाना बनाया गया। इस हमले के बाद सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव और बढ़ गया है। ईरान की नोबेल विजेता बोलीं- जंग और दमन की कीमत लोग चुका रहे ईरान की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नर्गिस मोहम्मदी ने कहा है कि देश में चल रही जंग, आर्थिक संकट और सरकारी दमन का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। उन्होंने AP से बातचीत में कहा कि हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। मोहम्मदी ने कहा कि पिछले डेढ़ साल में समाज में सरकारी दमन और बढ़ा है। आर्थिक दबाव के साथ लोगों पर बढ़ती पाबंदियों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। मोहम्मदी ने कहा कि इसके बावजूद कई ईरानी अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने खास तौर पर युवा पीढ़ी का जिक्र किया, जो अपने अधिकारों को समझती है और विरोध करने से पीछे नहीं हट रही। नर्गिस मोहम्मदी खुद भी लंबे समय तक जेल में रहीं नर्गिस मोहम्मदी कई सालों से मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाती रही हैं और कई बार जेल जा चुकी हैं। उन्हें 2023 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था। दिसंबर में हिरासत के दौरान उन्होंने सुरक्षा बलों पर मारपीट का आरोप लगाया था। बाद में तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जमानत पर रिहा कर अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्होंने बताया कि अब उनकी सेहत में सुधार हो रहा है। ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- इजराइली सेना में हथियार-सैनिक कम पड़े:3 साल की जंग में टैंक भी घिसे, बोइंग से 12 अपाचे हेलिकॉप्टर की डील भी अटकी इजराइल में सेना के पास कुछ हथियारों और सैनिकों की कमी हो गई है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है। अखबार मारिव के मुताबिक 3 साल की जंग में इजराइली सेना ने जितना गोला-बारूद इस्तेमाल किया, वह पिछले 30 साल में इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद के बराबर था। पूरी खबर यहां पढ़ें…