रूस में संसदीय चुनाव के आखिरी दिन रविवार को मॉस्को और आसपास के इलाकों में यूक्रेन ने 1600 से ज्यादा ड्रोन से हमला किया। इनमें करीब 450 ड्रोन मॉस्को की तरफ बढ़ रहे थे। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, हमले में कम से कम 2 लोगों की मौत हुई। इनमें एक 44 साल की महिला और एक बुजुर्ग व्यक्ति शामिल हैं। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन के मुताबिक राजधानी की एक बड़ी ऑयल रिफाइनरी को भी नुकसान पहुंचा है। फिलहाल रिफाइनरी में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है। एक ड्रोन के 21 मंजिला अपार्टमेंट से टकराने के बाद आग लग गई। इसके बाद करीब 400 लोगों को इमारत से बाहर निकाला गया। इनमें 70 बच्चे भी शामिल थे। रूस में यूक्रेन जंग के बाद पहला संसदीय चुनाव रूस में शुक्रवार से संसदीय चुनाव के लिए मतदान चल रहा है। यह फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस चुनाव को यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों के लिए जनता के समर्थन की परीक्षा के तौर पर पेश किया है। चुनाव के नतीजों को रूस पुतिन की नीतियों और यूक्रेन युद्ध के समर्थन के तौर पर पेश कर सकता है। भारतीय समयानुसार रविवार रात 11:30 बजे से शुरुआती नतीजे आने की उम्मीद है। चुनाव के पूरे नतीजे सोमवार तक सामने आ सकते हैं। रूस ने चुनाव में यूक्रेन के दखल का आरोप लगाया रूसी अधिकारियों ने चुनाव प्रक्रिया में यूक्रेन के दखल का आरोप लगाया है। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, मॉस्को की ऑनलाइन वोटिंग सिस्टम पर साइबर हमला हुआ। हालांकि, हमले के पीछे यूक्रेन का हाथ होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी यूक्रेन पर चुनाव में बाधा डालने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने रूसी नियंत्रण वाले जपोरिज्जिया इलाके में एक चुनाव अधिकारी के घर पर हुए हमले का जिक्र किया। पुतिन के मुताबिक, हमले में अधिकारी एलेना अस्तानिना की मौत हुई। हालांकि रॉयटर्स के मुताबिक इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी। ज्यादातर युद्ध विरोधी उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ पाए रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस में ज्यादातर ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने नहीं दिया गया, जो यूक्रेन युद्ध के खिलाफ हैं। याब्लोको पार्टी के कुछ उम्मीदवार ही चुनाव लड़ रहे हैं। पार्टी के नेताओं का कहना है कि युद्ध के खिलाफ बोलने पर उन्हें सरकार की कार्रवाई का डर है। रूस में सेना के खिलाफ बोलने या सरकार की नजर में झूठी खबर फैलाने पर जेल हो सकती है। याब्लोको पार्टी के नेता निकोलाई रिबाकोव ने विरोध जताया। उन्होंने बैलेट पर अपनी पार्टी का नाम लिख दिया। चुनाव का नतीजा राष्ट्रपति पुतिन के लिए अहम रॉयटर्स के मुताबिक, रूस की सत्तारूढ़ यूनाइटेड रशिया पार्टी के संसद में अपना दबदबा बनाए रखने की उम्मीद है। हालांकि, यूक्रेन युद्ध की वजह से बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबाव का असर कुछ विपक्षी पार्टियों को मिल सकता है। बर्लिन के NEST थिंक टैंक के मुताबिक, कम्युनिस्ट पार्टी और न्यू पीपल्स पार्टी को सत्ता पक्ष के खिलाफ जाने वाले कुछ वोट मिल सकते हैं। हालांकि, दोनों पार्टियों ने कई बड़े मुद्दों पर यूनाइटेड रशिया का साथ दिया है। पुतिन ने चुनाव से पहले टीवी पर देश को संबोधित करते हुए कहा था कि लोगों का वोट यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों के समर्थन को दिखाएगा। पुतिन के लिए ये चुनाव क्यों अहम है, 5 सवालों के जरिए समझिए … सवाल 1: रूस में संसदीय चुनाव कैसे होता है?जवाब: रूस की संसद को फेडरल असेंबली कहते हैं। भारत की तरह इसके 2 सदन हैं- ऊपरी सदन फेडरेशन काउंसिल और निचला सदन स्टेट ड्यूमा। रूस में राष्ट्रपति सबसे शक्तिशाली पद होता है। इसके बाद प्रधानमंत्री और फिर फेडरेशन काउंसिल के अध्यक्ष का नंबर आता है। सवाल 2: रूस में अभी कौन सा चुनाव हो रहा है? जवाब: रूस की संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा के चुनाव हो रहे हैं। इसमें 450 सीटों के लिए मतदान होता है। सवाल 3: 450 सीटों का चुनाव कैसे होता है? जवाब: 225 सीटों पर पार्टी को मिले वोट के आधार पर सदस्य चुने जाते हैं। बाकी 225 सीटों पर अलग-अलग इलाकों से सीधे उम्मीदवार चुने जाते हैं। इन्हीं 450 सीटों के लिए 18 से 20 सितंबर 2026 तक मतदान हुआ। सवाल 4: क्या इस चुनाव में राष्ट्रपति भी चुना जाएगा? जवाब: नहीं। इस चुनाव में सिर्फ संसद के सदस्यों का चुनाव हो रहा है। राष्ट्रपति का चुनाव अलग से 2028 में होगा। सवाल 5: इस चुनाव को इतना अहम क्यों माना जा रहा है? जवाब: यह 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पहला संसदीय चुनाव है। पुतिन ने कहा कि इस चुनाव में जनता का वोट यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों के समर्थन को दिखाएगा। चुनाव के नतीजों से यह भी संकेत मिलेगा कि युद्ध के बीच रूस में सत्ता और उसकी नीतियों को कितना राजनीतिक समर्थन मिल रहा है। -------------------- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका ने मिडिल-ईस्ट में दूतावासों को अलर्ट भेजा:ट्रम्प छुट्टी खत्म होने से पहले व्हाइट हाउस लौटे; दावा- अमेरिकी विमान ब्रिटिश एयरबेस से रवाना हुए मिडिल-ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका ने इलाके में मौजूद अपने दूतावासों और नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने लोगों से ज्यादा सतर्क रहने को कहा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…