साल 1956 में अफ़ग़ानिस्तान गई टीम में पुरातत्व विभाग के दो अधिकारी टीएन रामचंद्रन और वाईडी शर्मा भी शामिल थे. दोनों अधिकारियों ने इस मूर्ति पर अपनी रिपोर्ट नई दिल्ली में जमा की थी.