Cancer Rehabilitation Exercises And Benefits: कैंसर का नाम सुनते ही आमतौर पर दवाइयों, जांच और इलाज की प्रक्रिया का ख्याल आता है. लेकिन कैंसर से जूझ रहे मरीज के लिए परेशानी सिर्फ बीमारी तक सीमित नहीं रहती. इलाज के दौरान और उसके बाद थकान, शरीर में दर्द, अकड़न, कमजोरी और चलने-फिरने में परेशानी जैसी कई दिक्कतें हो सकती हैं. ऐसे में शरीर को दोबारा सामान्य एक्टिविटी के लिए तैयार करने में फिजियोथैरेपी मददगार हो सकती है.कैंसर के इलाज के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं. लंबे समय तक आराम करने, सर्जरी, दवाइयों या दूसरे उपचारों के कारण मांसपेशियों की ताकत कम हो सकती है और शरीर की एक्टिविटी सीमित हो सकती हैं. कैंसर पुनर्वास में फिजियोथैरेपी का मकसद इन परेशानियों को कम करने, चलने-फिरने की क्षमता सुधारने और रोजमर्रा के कामों को आसान बनाने में मदद करना है.फिजियोथैरेपी क्या होती है?हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली everhope के एक रिपोर्ट के अनुसार, कैंसर मरीजों के लिए फिजियोथैरेपी सामान्य व्यायाम जैसी नहीं होती. इसे मरीज की स्थिति, इलाज और शरीर की क्षमता को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है. इसमें हल्की और नियंत्रित गतिविधियों के जरिए शरीर की ताकत, संतुलन और गतिशीलता को बेहतर करने पर ध्यान दिया जाता है. हर मरीज की जरूरत अलग हो सकती है. किसी को चलने में परेशानी हो सकती है, किसी को हाथ-पैरों में अकड़न या कमजोरी महसूस हो सकती है, जबकि कुछ मरीज लगातार थकान से परेशान रहते हैं. फिजियोथैरेपिस्ट इन्हीं समस्याओं के अनुसार अभ्यास और दूसरी तकनीकों की सलाह देते हैं.इलाज के बाद शरीर की ताकत बढ़ाने में मददकैंसर के इलाज के दौरान शरीर कमजोर हो सकता है. लंबे समय तक कम गतिविधि करने से मांसपेशियों की ताकत और शरीर की गतिशीलता प्रभावित हो सकती है. फिजियोथैरेपी में हल्की और निर्देशित गतिविधियों के जरिए धीरे-धीरे ताकत वापस लाने की कोशिश की जाती है. इसका मकसद शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालना नहीं, बल्कि उसकी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ना होता है.दर्द और अकड़न में मिल सकती है राहतइलाज के दौरान या उसके बाद शरीर में दर्द, अकड़न, सूजन और नसों से जुड़ी परेशानी हो सकती है. कुछ मरीजों को लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने की वजह से भी शरीर में जकड़न महसूस होती है. ऐसी स्थिति में फिजियोथैरेपी के तहत हल्की एक्टिविटी, खिंचाव और सांस से जुड़े अभ्यास मदद कर सकते हैं. हालांकि कौन सा अभ्यास करना है और कितनी मात्रा में करना है, यह मरीज की स्थिति देखकर विशेषज्ञ तय करते हैं.थकान को संभालने में मददकैंसर के इलाज के बाद लगातार थकान महसूस होना आम परेशानी हो सकती है. ऐसे में ज्यादा मेहनत वाला व्यायाम करने के बजाय शरीर की क्षमता के अनुसार हल्की गतिविधियों को शामिल किया जाता है. नियमित और सही तरीके से की गई गतिविधियां शरीर को सक्रिय रखने और रोजमर्रा के कामों को संभालने में मदद कर सकती हैं.रोजमर्रा के काम आसान बनाने में मददइलाज के बाद कई मरीजों के लिए चलना, सीढ़ियां चढ़ना, कपड़े पहनना या लंबे समय तक खड़े रहना भी मुश्किल हो सकता है. फिजियोथैरेपी का एक अहम उद्देश्य मरीज को इन रोजमर्रा की गतिविधियों के लिए दोबारा तैयार करना है. धीरे-धीरे ताकत और संतुलन में सुधार होने से मरीज अपने काम खुद करने में ज्यादा सहज महसूस कर सकता है.संतुलन और आत्मविश्वास बेहतर करने में मददकमजोरी या लंबे समय तक कम गतिविधि के कारण शरीर का संतुलन प्रभावित हो सकता है. इससे गिरने का डर भी बढ़ सकता है. फिजियोथैरेपी में शरीर के संतुलन और तालमेल को बेहतर करने वाले अभ्यास शामिल किए जा सकते हैं. इससे मरीज को दोबारा चलने-फिरने का भरोसा हासिल करने में मदद मिल सकती है.कैंसर के इलाज के हर चरण में अलग भूमिकाफिजियोथैरेपी की जरूरत सिर्फ इलाज खत्म होने के बाद ही नहीं होती. इलाज शुरू होने से पहले भी मरीज की शारीरिक स्थिति को बेहतर बनाए रखने के लिए विशेषज्ञ सलाह दे सकते हैं. इलाज के दौरान इसका उद्देश्य शरीर को सक्रिय रखने और होने वाली शारीरिक परेशानियों को संभालने में मदद करना हो सकता है. इलाज के बाद ध्यान ताकत, गतिशीलता और रोजमर्रा के कामों में फ्रीडम वापस पाने पर दिया जाता है.फिजियोथैरेपी के एक सत्र में क्या होता हैसत्र की शुरुआत आमतौर पर मरीज की स्थिति समझने से होती है. फिजियोथैरेपिस्ट यह जानने की कोशिश करते हैं कि मरीज को इस समय किस तरह की परेशानी हो रही है, इलाज का शरीर पर क्या असर पड़ा है और कौन सी गतिविधि मुश्किल लग रही है. इसके बाद मरीज की क्षमता के अनुसार हल्की गतिविधियां या अभ्यास कराए जा सकते हैं. हर दिन शरीर की स्थिति एक जैसी नहीं होती. किसी दिन मरीज ज्यादा सक्रिय महसूस कर सकता है, जबकि दूसरे दिन थकान ज्यादा हो सकती है. इसलिए अभ्यास की गति और मात्रा भी उसी के अनुसार रखी जाती है. कुछ मामलों में हल्का योग या सांस से जुड़े अभ्यास भी विशेषज्ञ की सलाह से शामिल किए जा सकते हैं.फिजियोथैरेपी से क्या फायदे मिल सकते हैंफिजियोथैरेपी का उद्देश्य मरीज की शारीरिक क्षमता और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद करना है. इससे मांसपेशियों की ताकत और शरीर की एक्टिविटी में सुधार, दर्द और अकड़न को संभालने, थकान से निपटने, संतुलन बेहतर करने और रोजमर्रा के कामों को आसान बनाने में मदद मिल सकती है. हालांकि फिजियोथैरेपी कैंसर को रोकने या उसका इलाज करने की प्रक्रिया नहीं है. इसका मुख्य उद्देश्य कैंसर के निदान और उपचार के बाद मरीज की शारीरिक क्षमता, गतिविधियों और जीवन की क्वालिटी को बेहतर बनाने में सहयोग देना है.इसे भी पढ़ें : अच्छी नींद के बाद भी रहती है थकान, वजह सिर्फ स्ट्रेस या नींद की कमी नहींकब शुरू करें फिजियोथैरेपी?हर मरीज के लिए फिजियोथैरेपी का समय और तरीका अलग हो सकता है. कैंसर का प्रकार, इलाज का तरीका, सर्जरी हुई है या नहीं, मौजूदा लक्षण और मरीज की शारीरिक स्थिति जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी होता है. इसलिए फिजियोथैरेपी शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है. कैंसर से उबरने की प्रक्रिया हर व्यक्ति के लिए अलग होती है. इलाज खत्म होने के तुरंत बाद शरीर पहले जैसा महसूस करे, यह जरूरी नहीं है. ऐसे में सही मार्गदर्शन के साथ की गई फिजियोथैरेपी शरीर को धीरे-धीरे सक्रिय बनाने और रोजमर्रा की जिंदगी में वापस लौटने में मदद कर सकती है.इसे भी पढ़ें : त्योहार का तेज शोर दिल के लिए भी खतरनाक, डॉक्टरों ने दी सलाह