ऑनलाइन सट्टेबाजी पर कानून सख्त होने के बावजूद इसका बाजार खत्म नहीं हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में इसका अवैध बाजार करीब 10 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। कानून से बचने के लिए प्लेटफॉर्म विदेश शिफ्ट किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 805 अवैध ऑनलाइन सट्टा प्लेटफॉर्म पर 540 करोड़ से ज्यादा विजिट दर्ज हुईं। यानी रोज औसतन करीब 1.49 करोड़ बार इन प्लेटफॉर्म तक पहुंच बनाई गई। इनके प्रचार में 854 इन्फ्लुएंसर भी शामिल थे। सट्टेबाजी चलाने के लिए म्यूल बैंक खाते, टेलीग्राम समूह, नए डोमेन और विदेशी सर्वर का इस्तेमाल किया जा रहा है। संसद ने 2025 में ऑनलाइन मनी गेम पर रोक लगाने वाला कानून पारित किया था, जो 2 अप्रैल 2026 से लागू है। दुनियाभर में 8 करोड़ वयस्क को सट्टे की लत; हर यूजर से जुड़े 6 लोग प्रभावित रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में 8 करोड़ वयस्क सट्टे की लत से जूझ रहे हैं। इसका असर सिर्फ सट्टा खेलने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। हर यूजर से औसतन 6 लोग प्रभावित होते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 60% यूजर पैसे हारते हैं। इससे इलाज और पढ़ाई प्रभावित हो सकती है और इसका असर पीढ़ियों तक रह सकता है। एल्गोरिदम यूजर को खेल की आदत लगाते हैं ऑनलाइन गेमिंग में पैसे वाले खेलों के दौरान भ्रामक डिजाइन, लत बढ़ाने वाले एल्गोरिदम, बॉट और एजेंट का इस्तेमाल किया जाता है। जीत मिलने पर यूजर को इनाम का अहसास होता है। हारने के बाद रकम वापस पाने के चक्कर में अगला और बड़ा दांव लगाने की कोशिश होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, लत के तीन संकेत हैं—नियंत्रण खोना, सट्टे को प्राथमिकता देना और नुकसान के बावजूद खेलते रहना। अंतरराष्ट्रीय निगरानी और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही जरूरी साइबर और डेटा प्राइवेसी एक्सपर्ट रितेश भट्टिया के मुताबिक इंटरनेट सीमाहीन है। किसी वेबसाइट या ऐप को ब्लॉक करना स्थायी समाधान नहीं है। कंपनियां नया डोमेन, ऐप या एपीके फाइल बनाकर फिर लौट सकती हैं। भट्टिया ने बताया कि सभी देशों को मिलकर साझा नियम बनाने होंगे। संबंधित एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और लगातार निगरानी जरूरी है। सरोगेट विज्ञापनों की जिम्मेदारी ऐप, ओटीटी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को लेनी होगी। एआई की मदद से विज्ञापनों की जांच की जा सकती है। ऑनलाइन सट्टेबाजी मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय सुरक्षा से भी जुड़ी है। अवैध रकम को क्रिप्टो में बदलकर दूसरे देशों तक पहुंचाया जा सकता है। इसलिए तकनीकी निगरानी, प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी और अंतरराष्ट्रीय समन्वय जरूरी है।