चुनाव आयोग के इस फ़ैसले को ममता बनर्जी के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है. शिव सेना और एनसीपी के मामले में भी पहले चुनाव चिह्न फ्रीज़ कर दिए गए थे और बाद में दोनों मामलों में बाग़ी गुटों को आवंटित कर दिया गया था.