स्तन कैंसर की जांच को बेहतर बनाने के लिए AIIMS नई दिल्ली ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मैमोग्राफी तकनीक को BPL Technologies Limited को ट्रांसफर किया है. यह तकनीक मैमोग्राफी की तस्वीरों को समझने और उनकी व्याख्या करने में रेडियोलॉजिस्ट की मदद करने के लिए विकसित की गई है.AIIMS ने BPL Technologies को ट्रांसफर की तकनीकAIIMS नई दिल्ली और BPL Technologies के बीच यह टेक्नोलॉजी ट्रांसफर 16 सितंबर को हुआ. इस दौरान AIIMS नई दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर निखिल टंडन और BPL Technologies के CFO अजय जिंदल मौजूद रहे. कार्यक्रम में AIIMS के रिसर्च और रेडियोलॉजी विभाग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ भी शामिल हुए.यह तकनीक AIIMS की टीम ने विकसित की है. इसमें रेडियोलॉजी और मशीन लर्निंग से जुड़े विशेषज्ञों ने काम किया है. इसका मकसद मैमोग्राफी की जांच को समझने में रेडियोलॉजिस्ट को तकनीकी सहायता देना है. मैमोग्राफी में AI कैसे करेगी मदद?मैमोग्राफी स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली अहम इमेजिंग जांच है. इसमें स्तन की तस्वीरें ली जाती हैं, जिन्हें रेडियोलॉजिस्ट जांचकर किसी असामान्य हिस्से या संदिग्ध बदलाव की पहचान करते हैं. AIIMS की विकसित की गई AI तकनीक इसी प्रक्रिया में रेडियोलॉजिस्ट की मदद करेगी. यह मैमोग्राफी की तस्वीरों की व्याख्या में अतिरिक्त तकनीकी सहायता दे सकती है. खासतौर पर उन जगहों पर इसका फायदा हो सकता है, जहां ब्रेस्ट इमेजिंग के विशेषज्ञों की संख्या सीमित है. हालांकि, इस तकनीक को डॉक्टरों के विकल्प के तौर पर पेश नहीं किया गया है. AI का इस्तेमाल रेडियोलॉजिस्ट के निर्णय में मदद करने के लिए किया जाएगा. मैमोग्राफी की रिपोर्ट और मरीज के इलाज से जुड़े अंतिम फैसले के लिए डॉक्टर की भूमिका बनी रहेगी. अभी सीधे मरीजों के इस्तेमाल के लिए तैयार नहींटेक्नोलॉजी को BPL Technologies को ट्रांसफर किए जाने का मतलब यह नहीं है कि AI तकनीक अब तुरंत अस्पतालों में मरीजों की जांच के लिए इस्तेमाल होने लगेगी. ट्रांसफर के बाद BPL Technologies इस तकनीक पर आगे काम करेगी. इसमें तकनीक का विकास, अलग-अलग परिस्थितियों में इसकी वैलिडेशन और संभावित क्लिनिकल इस्तेमाल की दिशा में काम शामिल है. AIIMS की रिसर्च को अस्पतालों तक पहुंचाने की पहलAIIMS के मुताबिक, इस टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से मेडिकल रिसर्च को वास्तविक स्वास्थ्य सेवाओं में इस्तेमाल होने वाली तकनीक में बदलने का रास्ता खुलता है. AIIMS निदेशक प्रोफेसर निखिल टंडन ने भी अकादमिक संस्थानों में होने वाली रिसर्च को वास्तविक स्वास्थ्य जरूरतों से जोड़ने पर जोर दिया. छोटे शहरों और विशेषज्ञों की कमी वाले इलाकों में मिल सकती है मददभारत में कई जगहों पर ब्रेस्ट इमेजिंग के विशेषज्ञों की उपलब्धता सीमित है. ऐसे क्षेत्रों में अगर यह AI तकनीक आगे की जांच और वैलिडेशन के बाद क्लिनिकल इस्तेमाल के लिए उपयुक्त साबित होती है तो यह रेडियोलॉजिस्ट को मैमोग्राफी इमेज समझने में अतिरिक्त सहायता दे सकती है.ये भी पढ़ें: अब हर मेडिकल स्टोर पर CCTV कैमरा अनिवार्य, सरकार ने तैयार किया बड़ा प्लान