नर्मदा जब उफान पर थी, तब नगर के एक हिस्से को अपने साथ बहा ले गई थी। मकान ढहे व लोगों को अपना ठिकाना बदलना पड़ा, लेकिन नृसिंह टेकड़ी पर विराजित गणेशजी अपनी जगह अडिग रहे। मंदिर का भवन भले ही बाढ़ की मार से टूट गया और छत ढह गई, मगर विघ्नहर्ता की प्रतिमा को आंच तक नहीं आई।