जिंदा जमीन मालिक की जानकारी के बिना उसकी जगह दूसरा व्यक्ति खड़ा होकर जमीन की रजिस्ट्री करा दे और इसके कुछ ही दिनों बाद राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण की प्रक्रिया भी शुरू हो जाए, तो सवाल केवल जमीन के फर्जीवाड़े तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी प्रक्रिया पर उठता है।