Smartwatches को चार्ज करना आज भी झंझट भरा काम, USB-C Ports का क्यों नहीं होता यूज?

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Smartwatch Charging: ऐप्पल ने आईफोन में चार्जिंग के लिए लाइटनिंग कनेक्टर की जगह मे दे दिया है. कई एंड्रॉयड फोन में पहले से ही यह पोर्ट अवेलेबल है. यानी आईफोन और एंड्रॉयड फोन को एक जैसे चार्जर से ही चार्ज किया जा सकता है, लेकिन स्मार्टवॉच के मामले में ऐसा नहीं है. हर कंपनी की स्मार्टवॉच के लिए चार्जर अलग होता है और एक चार्जर से दूसरे ब्रांड की स्मार्टवॉच चार्ज नहीं की जा सकती. अगर एक कंपनी लगभग अपने हर मॉडल के लिए अलग-अलग चार्जर देती है. इस कारण स्मार्टवॉच को चार्ज करना आज भी झंझट भरा काम बना हुआ है. ऐसे में सवाल उठता है कि चार्जिंग को आसान बनाने के लिए स्मार्टवॉच में फोन की तरह USB-C Port का यूज क्यों नहीं होता? आइए इसका जवाब जानते हैं.स्मार्टवॉच में क्यों नहीं आता USB-C Port?कंपनियों के लिए हर स्मार्टवॉच में अलग-अलग चार्जर की जगह USB-C Port देना क्यों मुश्किल है? इसके पीछे कई कारण हैं. अगर फोन की तरह स्मार्टवॉच में USB-C Port दिया जाए तो इसकी वाटरप्रूफिंग पर असर पड़ सकता है. इसी तरह पोर्ट को काफी स्पेस की जरूरत पड़ेगी. स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड में इतनी जगह नहीं होती कि इस पोर्ट को फिट किया जा सके.स्लिम मॉडल में तो स्पेस की यह कमी और ज्यादा बढ़ जाती है. इसके अलावा फोन की तरह स्मार्टवॉच एक जैसी नहीं होती. फोन भले ही अलग-अलग कंपनियां बना रही हैं, लेकिन इनकी शेप लगभग एक जैसी होती है. स्मार्टवॉच में ऐसा नहीं होता. हर कंपनी अलग-अलग शेप और साइज के मॉडल बना रही है, जिसके चलते हर मॉडल में एक जैसे चार्जर देना मुश्किल भरा काम हो सकता है.क्या वायरलेस चार्जिंग भी नहीं आ सकती काम?अब कई लोगों के मन में यह सवाल आ सकता है कि जब एक जैसा चार्जर नहीं दिया जा सकता तो वायरलेस चार्जिंग इसका समाधान नहीं है? वायरलेस चार्जर इस समस्या का समाधान हो सकता है, लेकिन इसकी अपनी दिक्कतें हैं. वायरलेस चार्जिंग स्लो होती है. इसके अलावा चार्जिंग के लिए डिवाइस को एकदम सटीक जगह पर रखना पड़ता है. अब Qi2 स्टैंडर्ड जैसे एडवांस्मेंट हुए हैं, लेकिन इसके लिए स्मार्टवॉच में वायरलेस चार्जिंग की कैपेबिलिटी होनी चाहिए. डिजाइन और यूटिलिटी को देखते हुए अधिकतर कंपनियां यह फीचर देने को तैयार नहीं हैं. ऐसे में ग्राहकों के पास हर स्मार्टवॉच के साथ नया चार्जर लेना जरूरी बन जाता है. भले ही इससे इलेक्ट्रॉनिक कचरे में इजाफा हो रहा हो.ये भी पढ़ें- क्या ऐप से बंद हो सकता है सड़क पर चलता इलेक्ट्रिक रिक्शा? जानें क्या है BAT-BMS का मामला