"आपका फेवरेट फूड क्या है?" इस सवाल का जवाब देते समय ज्यादातर लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि भोजन का रिश्ता सिर्फ भूख से नहीं, बल्कि खुशी और संतुष्टि से भी होता है। यही वजह है कि अब न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स ‘विटामिन P’ (प्लेजर) यानी भोजन से मिलने वाली खुशी को भी हेल्दी ईटिंग का अहम हिस्सा मान रहे हैं। साल 2020 में ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक रिव्यू में 100 से ज्यादा स्टडीज को एनालाइज किया गया। रिव्यू में शामिल 57% स्टडीज में पाया गया कि जो लोग खाने का आनंद लेते हैं, उनमें हेल्दी ईटिंग की आदतें भी बेहतर होती हैं। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में विटामिन P यानी भोजन से मिलने वाली खुशी की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. अनु अग्रवाल, सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन, फाउंडर- ‘वनडाइटटुडे’ सवाल- विटामिन P क्या है? जवाब- विटामिन P कोई असली विटामिन नहीं है। यहां P का मतलब ‘प्लेजर’ यानी भोजन से मिलने वाली खुशी, संतुष्टि और आनंद से है। यह कॉन्सेप्ट बताता है कि हेल्दी ईटिंग सिर्फ पोषक तत्वों तक सीमित नहीं है, बल्कि भोजन का आनंद लेना भी अच्छी सेहत का हिस्सा है। सवाल- अगर खाना स्वादिष्ट है और उसे खाने से खुशी मिल रही है तो ये खुशी ब्रेन को कैसे प्रभावित करती है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- खुशी से खाना खाने का शरीर पर क्या असर पड़ता है? जवाब- इससे पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम (शरीर का 'रेस्ट एंड डाइजेस्ट' सिस्टम) एक्टिव हो जाता है। साथ ही सलाइवा (लार), पेट के एसिड और डाइजेस्टिव एंजाइम्स का सिक्रिशन बढ़ता है। इसका असर ये होता है- सवाल- क्या खाने से मिलने वाली खुशी पाचन तंत्र को प्रभावित करती है? जवाब- हां, ब्रेन और डाइजेस्टिव सिस्टम के बीच सीधा संबंध होता है। इसे ‘गट-ब्रेन एक्सिस’ कहते हैं। जब व्यक्ति स्ट्रेस-फ्री होकर भोजन करता है, तो ब्रेन पाचन तंत्र को ऐसे संकेत भेजता है, जो डाइजेशन को सपोर्ट करते हैं। सवाल- गुस्से, चिंता या तनाव में खाना खाने से क्या होता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- अगर बीमारी में ‘हैप्पी फूड’ खाएं तो क्या इससे रिकवरी में मदद मिलती है? जवाब- हां, लेकिन हैप्पी फूड का मतलब जंक फूड नहीं है। ऐसा पौष्टिक भोजन, जिसे खाने में स्वाद और आनंद मिले, वही रिकवरी में मदद कर सकता है। इससे शरीर को जरूरी एनर्जी, प्रोटीन व अन्य पोषक तत्व मिलते हैं। ये पोषक तत्व शरीर को इन्फेक्शन से लड़ने और डैमेज्ड टिश्यूज को रिपेयर करने में मदद करते हैं। सवाल- प्लेजर ईटिंग और इमोशनल ईटिंग में क्या फर्क है? जवाब- प्लेजर ईटिंग में व्यक्ति भोजन का स्वाद, खुशबू और आनंद लेने के लिए खाता है। वहीं इमोशनल ईटिंग में व्यक्ति तनाव, उदासी, अकेलेपन, गुस्से या किसी अन्य भावना से निपटने के लिए खाना खाता है। ग्राफिक में दोनों के बीच का फर्क देखिए- सवाल- कैसे पहचानें कि इमोशनल ईटिंग कर रहे हैं? जवाब- अगर आप भूख मिटाने की बजाय मूड बेहतर करने के लिए खा रहे हैं, तो यह इमोशनल ईटिंग हो सकती है। ग्राफिक में सभी संकेत देखिए- सवाल- क्या परिवार के साथ मिलकर खाना मेंटल हेल्थ के लिए अच्छा होता है? जवाब- हां, इससे मेंटल हेल्थ पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। कनाडाई लेखिका और एंथ्रोपोलॉजिस्ट मार्गरेट विस्सर अपनी किताब ‘द रिचुअल्स ऑफ डिनर’ में लिखती हैं- “भोजन केवल भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने वाला सामाजिक अनुभव भी है। साथ बैठकर खाना खाने से बातचीत, भावनात्मक जुड़ाव और अपनापन बढ़ता है। इससे तनाव और अकेलेपन की भावना कम हो सकती है।” सवाल- क्या मोबाइल देखते हुए खाना विटामिन P को कम कर देता है? जवाब- हां, इससे हमारा ध्यान खाने की बजाय स्क्रीन पर रहता है। ऐसे में हम भोजन के स्वाद, खुशबू, टेक्सचर और पूरे अनुभव को उतना महसूस नहीं कर पाते। नतीजतन, खाना सिर्फ पेट भरने की प्रक्रिया बनकर रह जाता है और भोजन से मिलने वाला आनंद कम हो सकता है। इससे माइंडफुल ईटिंग की आदत विकसित नहीं हो पाती। सवाल- अगर जंक या अनहेल्दी फूड से खुशी मिलती है तो क्या वो विटामिन P भी हेल्थ के लिए अच्छा है? जवाब- नहीं, अगर कोई भोजन बार-बार खाने की इच्छा बढ़ाए और लंबे समय में शरीर को नुकसान पहुंचाए, तो वह विटामिन P नहीं माना जाएगा। इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- हेल्दी फूड को टेस्टी कैसे बनाएं और उसे खाने का आनंद कैसे बढ़ाएं? जवाब- हेल्दी फूड को स्वादिष्ट बनाने के लिए उसमें पोषण के साथ स्वाद, खुशबू, टेक्सचर और प्रेजेंटेशन पर भी ध्यान देना जरूरी है। जब भोजन देखने, सूंघने और खाने में अच्छा लगता है, तो उसका आनंद बढ़ जाता है। ग्राफिक में फूड को हेल्दी और टेस्टी बनाने के टिप्स देखिए- हेल्दी ईटिंग का मतलब सिर्फ कैलोरी, प्रोटीन या विटामिन गिनना नहीं है, बल्कि भोजन के साथ एक सकारात्मक और संतुलित रिश्ता बनाना भी है। जब खाने से पर्याप्त पोषण और आनंद दोनों मिलता है तभी हमारा स्वास्थ्य बेहतर रहता है। *************** ग्राफिक्स- अंकुर बंसल …………………………… ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- पेनकिलर खाने से खराब हुई किडनी:डॉक्टर से जानें इसके साइड इफेक्ट्स, कब पेनकिलर लेना सही, बिना दवा दर्द कैसे कम करें मध्य प्रदेश के इंदौर में रहने वाले 31 वर्षीय नंदराम को बुखार और हाथ-पैर में दर्द था। पेन रिलीफ के लिए उन्होंने मेडिकल स्टोर से खरीदकर पेनकिलर खाना शुरू कर दिया। दवा खाने पर कुछ समय के लिए आराम मिलता, लेकिन कुछ देर बाद दोबारा दर्द होने लगता। वे हर बार पेनकिलर ले लेते। धीरे-धीरे यह उनकी आदत बन गई। पूरी खबर पढ़ें…