पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में एक 16 साल का लड़का इकबाल शेख घंटों तालाब के पानी में खड़ा रहता है। वजह है, उसके शरीर में होने वाली तेज जलन और गर्माहट। पानी से बाहर आते ही जलन बढ़ जाती है। ठंडे पानी में रहने से राहत मिलती है। डॉक्टरों का कहना है कि उसे एरिथ्रोमेलैल्जिया है। यह एक रेयर न्यूरोवेस्कुलर डिसऑर्डर है। इसमें हाथों या पैरों में तेज जलन, दर्द, लालिमा और असामान्य गर्माहट महसूस होती है। ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, पूरी दुनिया में एक लाख में से 2 लोगों को यह बीमारी होती है। एक अनुमान के मुताबिक भारत में पीड़ितों की संख्या 28,000 तक हो सकती है। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में एरिथ्रोमेलैल्जिया की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. रत्नेश जेनॉ, सीनियर कंसल्टेंट, जनरल, लेप्रोस्कोपिक एंड वैस्कुलर सर्जरी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- एरिथ्रोमेलैल्जिया क्या है? ये बीमारी शरीर के किस हिस्से को प्रभावित करती है? जवाब- एरिथ्रोमेलैल्जिया नसों और स्किन की छोटी ब्लड वेसल्स से जुड़ी एक दुर्लभ बीमारी है। इसमें स्किन की छोटी ब्लड वेसल्स और नसें सामान्य तरीके से काम नहीं कर पातीं, जिससे शरीर के कुछ हिस्सों में ब्लड फ्लो असामान्य हो सकता है। इसमें खासतौर पर पैरों और हाथों में रेडनेस, असामान्य गर्माहट, जलन और दर्द होता है। कुछ लोगों में कान, चेहरा या शरीर के दूसरे हिस्से भी प्रभावित हो सकते हैं। सवाल- इस बीमारी में शरीर के अंदर ऐसा क्या होता है, जिसके कारण त्वचा लाल, गर्म और दर्दनाक हो जाती है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है? जवाब- हां, एरिथ्रोमेलैल्जिया किसी भी उम्र में हो सकता है। हालांकि इसके लक्षण अक्सर बचपन या किशोरावस्था में शुरू होते हैं, लेकिन कुछ लोगों में यह बीमारी वयस्क होने के बाद भी विकसित हो सकती है। सवाल- एरिथ्रोमेलैल्जिया के शुरुआती लक्षण क्या हैं? जवाब- शुरुआत में प्रभावित हिस्से में झनझनाहट, खुजली या चुभन जैसा अहसास हो सकता है। समय के साथ लक्षण ज्यादा स्पष्ट और गंभीर हो सकते हैं। ग्राफिक में सभी संकेत देखिए- सवाल- एरिथ्रोमेलैल्जिया के लक्षण किन परिस्थितियों में बढ़ते हैं? जवाब- गर्म मौसम, लंबे समय तक खड़े रहने, चलने-फिरने या शरीर का टेम्परेचर बढ़ने पर एरिथ्रोमेलैल्जिया के लक्षण बढ़ सकते हैं। ग्राफिक में सभी स्थितियां देखिए- सवाल- एरिथ्रोमेलैल्जिया क्यों होता है? जवाब- एरिथ्रोमेलैल्जिया के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कुछ लोगों में यह बीमारी जीन म्यूटेशन के कारण होती है, जबकि कुछ मामलों में यह ब्लड डिसऑर्डर, ऑटोइम्यून डिजीज, डायबिटीज या नसों से जुड़ी दूसरी बीमारियों से जुड़ी हो सकती है। हालांकि, कई मरीजों में इसकी कोई स्पष्ट वजह पता नहीं चल पाती है। सवाल- क्या कुछ दवाएं एरिथ्रोमेलैल्जिया को ट्रिगर कर सकती हैं? जवाब- हां, कुछ दवाएं या दवाओं में बदलाव कुछ लोगों में लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। इनमें कुछ ब्लड प्रेशर की दवाएं, ब्लड वेसल्स को प्रभावित करने वाली दवाएं और कुछ अन्य मेडिकेशंस शामिल हो सकते हैं। हालांकि हर व्यक्ति में ऐसा नहीं होता। इसलिए अगर किसी दवा को शुरू करने या उसकी खुराक बदलने के बाद लक्षण बढ़े हैं, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी दें। बिना सलाह दवा बंद न करें। सवाल- प्राइमरी और सेकेंडरी एरिथ्रोमेलैल्जिया में क्या अंतर है? जवाब- प्राइमरी एरिथ्रोमेलैल्जिया आमतौर पर जीन में बदलाव (म्यूटेशन) के कारण होता है और यह अपने आप विकसित होता है। वहीं, सेकेंडरी एरिथ्रोमेलैल्जिया किसी दूसरी बीमारी या मेडिकल कंडीशन के कारण होता है। ग्राफिक में दोनों के बीच का अंतर समझिए- सवाल- अगर किसी को एरिथ्रोमेलैल्जिया है, तो क्या डॉक्टर दूसरी बीमारियों की भी जांच करते हैं? जवाब- हां। खासकर अगर सेकेंडरी एरिथ्रोमेलैल्जिया का संदेह हो, तो डॉक्टर दूसरी बीमारियों की जांच करते हैं। कौन-सी जांच जरूरी है, यह मरीज के लक्षण और मेडिकल हिस्ट्री पर निर्भर करता है। सवाल- किन लक्षणों को सामान्य गर्मी या थकान समझकर इग्नोर नहीं करना चाहिए? जवाब- अगर इसकी वजह से नींद, पढ़ाई, कामकाज और रोजमर्रा की एक्टिविटी प्रभावित होने लगे, तो इसे सामान्य गर्मी या थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ग्राफिक से समझिए किन लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए- सवाल- डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए? जवाब- अगर यह समस्या बार-बार हो रही हो और उसका कारण स्पष्ट न हो, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। समय पर जांच से बीमारी की पहचान और इलाज आसान हो जाता है। ग्राफिक में देखिए, किन स्थितियों में डॉक्टर को दिखाएं- सवाल- इस बीमारी को कैसे डायग्नोस किया जाता है? जवाब- एरिथ्रोमेलैल्जिया का पता मुख्य रूप से लक्षणों और मरीज की मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर लगाया जाता है। डॉक्टर यह देखते हैं कि- जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट और दूसरी जांचों से इसके संभावित कारणों का पता लगाया जाता है। सवाल- एरिथ्रोमेलैल्जिया का इलाज क्या है? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए– सवाल- क्या एरिथ्रोमेलैल्जिया पूरी तरह ठीक हो सकता है? जवाब- यह इसके कारण पर निर्भर करता है। अगर एरिथ्रोमेलैल्जिया किसी दूसरी बीमारी से जुड़ा है और उसका सफल इलाज हो जाए, तो लक्षणों में काफी सुधार आ सकता है। हालांकि, कई मामलों में यह एक क्रॉनिक स्थिति होती है, जिसमें इलाज का उद्देश्य लक्षणों को नियंत्रित करना और लाइफ क्वालिटी बेहतर बनाना होता है। सवाल- अगर किसी को एरिथ्रोमेलैल्जिया है तो उसे रोजमर्रा की जिंदगी में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- सबसे जरूरी है कि व्यक्ति अपने लक्षणों के ट्रिगर पॉइंट्स पहचाने और उनसे बचने की कोशिश करे। ग्राफिक में सभी जरूरी सावधानियां देखिए- सवाल- एरिथ्रोमेलैल्जिया के ट्रिगर फैक्टर क्या हैं? क्या कुछ लाइफस्टाइल हैबिट इसके लक्षण बढ़ा सकती हैं? जवाब- हर व्यक्ति में ट्रिगर अलग हो सकते हैं। गर्मी, ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी और लंबे समय तक खड़े रहना कॉमन ट्रिगर हैं। इसलिए मरीज को यह पहचानना चाहिए कि उसके लक्षण किन परिस्थितियों में बढ़ते हैं और संभव हो तो उन परिस्थितियों से बचना चाहिए। ग्राफिक में सभी ट्रिगर्स देखिए- मिथ और फैक्ट मिथ: हर लाल और गर्म पैर एरिथ्रोमेलैल्जिया है। फैक्ट: नहीं। हाथों या पैरों में लालिमा और गर्माहट कई कारणों से हो सकती है। इन्फेक्शन, चोट, एलर्जी, गाउट, नसों की समस्याएं और ब्लड वेसल्स से जुड़ी कुछ अन्य बीमारियों में भी ऐसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। मिथ: सिर्फ गर्मी में पैरों में जलन होना एरिथ्रोमेलैल्जिया का संकेत है। फैक्ट: सिर्फ गर्मी में पैर जलना इस बीमारी की पुष्टि नहीं करता। एरिथ्रोमेलैल्जिया में आमतौर पर रेडनेस, असामान्य गर्माहट और दर्द के साथ बार-बार होने वाले एपिसोड का पैटर्न दिखता है। मिथ: ठंडे पानी में पैर डालना इसका इलाज है। फैक्ट: ठंडक से कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है, लेकिन यह बीमारी का इलाज नहीं है। मिथ: एरिथ्रोमेलैल्जिया एक संक्रामक बीमारी है। फैक्ट: नहीं। यह संक्रामक बीमारी नहीं है और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती। ……………………….. फिजिकल हेल्थ से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- कमर-जांघों की चर्बी सिर्फ मोटापा नहीं: हो सकता है लिपेडेमा, डॉक्टर से जानें इसके लक्षण, इलाज और बचाव के तरीके कुछ महिलाओं की जांघों और कूल्हों पर जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा हो जाती है। डाइटिंग और रेगुलर एक्सरसाइज से भी यह चर्बी कम नहीं होती। अक्सर लोग इसे मोटापा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार यह लिपेडेमा (Lipedema) का संकेत हो सकता है। पूरी खबर पढ़ें…