फतवे के आधार पर तलाक नहीं, कानूनी प्रक्रिया जरूरी, एमपी हाई कोर्ट का अहम आदेश

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कोर्ट ने पाया कि उसमें निकाह खत्म करने की घोषणा नहीं, बल्कि इस्लामी ग्रंथों के आधार पर पत्नी की कथित क्रूरता जैसी परिस्थितियों पर धार्मिक मार्गदर्शन दिया गया था। इसलिए इसे कानूनी तलाक नहीं माना जा सकता।