Science Behind Hiccups: जब भी हमें हिचकी आती तो अक्सर हमें यही कहा जाता है कि जब कोई व्यक्ति हमें याद करता है, तो हमें हिचकी आती है. यह बात इतनी आम हो चुकी है कि लोग हिचकी आते ही अपने दोस्तों या करीबियों का नाम याद करने लगते हैं. लेकिन क्या इस बात में थोड़ी सी भी सच्चाई है. चिकित्सा विज्ञान की मानें तो इसका किसी के याद करने या किसी भी तरह के भावनात्मक संबंध से कोई लेना-देना नहीं है. यह सिर्फ एक पुरानी सामाजिक मान्यता है जिसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. विज्ञान के अनुसार, हिचकी आने की प्रक्रिया पूरी तरह से शारीरिक होती है और इसके पीछे हमारे शरीर का एक खास नर्वस सिस्टम काम करता है.क्या होता है डायाफ्राम का रोल?मेडिकल साइंस के अनुसार, हिचकी आने का मुख्य कारण हमारे छाती और पेट के बीच स्थित एक मांसपेशी होती है, जिसे डायाफ्राम कहा जाता है. यह मांसपेशी हमारे फेफड़ों में सांस भरने और बाहर निकालने का काम करती है. सामान्य स्थिति में यह बहुत ही संतुलित तरीके से काम करती है. लेकिन जब किसी वजह से इस डायाफ्राम मांसपेशी में अचानक और अनैच्छिक सिकुड़न होने लगती है, तो हमारे सांस लेने की प्रक्रिया थोड़े समय के लिए प्रभावित होती है. इसी सिकुड़न के कारण गले में स्थित वोकल कॉर्ड्स बहुत तेजी से बंद हो जाते हैं, जिससे अचानक हवा रुकती है और हिच की आवाज निकलती है.इन वजहों से ट्रिगर होती है हिचकीमेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, डायाफ्राम में सिकुड़न पैदा करने के लिए हमारे शरीर की दो मुख्य नसें जिम्मेदार होती हैं, जिन्हें वेगस नर्व और फ्रेनिक नर्व कहा जाता है. जब इन नसों में किसी वजह से उत्तेजना या बेचैनी होती है, तो हिचकी शुरू हो जाती है. इसके कई सामान्य कारण हो सकते हैं, जैसे बहुत जल्दी-जल्दी भोजन चबाना, जरूरत से ज्यादा खाना खा लेना, या फिर कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का अधिक सेवन करना. इन सभी स्थितियों में हमारा पेट अचानक फैल जाता है और डायाफ्राम पर दबाव बनाता है, जिससे यह समस्या खड़ी होती है.ज्यादा हिचकी आने का वैज्ञानिक कारणआमतौर पर हिचकी कुछ ही मिनटों में अपने आप ठीक हो जाती है. लेकिन अगर किसी व्यक्ति को लगातार 48 घंटे से ज्यादा समय तक हिचकी आती रहे, तो इसे मेडिकल की भाषा में परसिस्टेंट हिचकी कहा जाता है. डॉक्टरों के मुताबिक, लंबे समय तक हिचकी आने के पीछे पेट में ज्यादा एसिड बनना, नसों में कोई गंभीर समस्या, या कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में घरेलू नुस्खे अपनाने के बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए क्योंकि यह शरीर के अंदर चल रही किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है.यह भी पढ़ें: Garlic Chutney Recipe: लहसुन चटनी खाकर मुंह ले दुर्गंध, ऐसे बनाएंगे तो नहीं होना पड़ेगा शर्मिंदाघरेलू उपाय और इसके पीछे का विज्ञानसामान्य हिचकी को रोकने के लिए लोग पानी पीते हैं या कुछ देर के लिए सांस रोक लेते हैं. विज्ञान के नजरिए से देखें तो यह तरीके सच में काम करते हैं. जब आप कुछ सेकंड के लिए अपनी सांस रोकते हैं, तो शरीर के अंदर कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा थोड़ी बढ़ जाती है, जिससे डायाफ्राम को रिलैक्स होने का सिग्नल मिलता है। वहीं, अचानक ठंडा पानी पीने से वेगस नर्व का ध्यान भटक जाता है और डायाफ्राम की सिकुड़न सामान्य हो जाती है. इसलिए अगली बार जब भी हिचकी आए, तो यह न सोचें कि कोई आपको याद कर रहा है, बल्कि थोड़ा पानी पीकर अपने नर्वस सिस्टम को आराम दें.यह भी पढ़ें: Firecracker Safety for Patients: पटाखों से दूर रहे यह लोग, जानलेवा हो सकता है इसका धुआं