सवाल- मैं 32 साल की हूं। मेरी शादी को चार साल हो गए हैं। दिवाली पर हर साल हम कभी मेरे मायके तो कभी ससुराल जाते हैं। वहां रिश्तेदारों से मिलना, सबके लिए खरीदारी करना और कई रस्में निभाना अच्छा तो लगता है, लेकिन इस भागदौड़ में हम दोनों अपने लिए समय नहीं निकाल पाते। इस बार हमने तय किया है कि दिवाली अपने घर पर ही मनाएंगे। साथ मिलकर खाना बनाएंगे, घर सजाएंगे और सुकून से त्योहार का आनंद लेंगे। लेकिन जब परिवार को यह बात बताई, तो उन्हें लगा कि हम रिश्तों से दूर हो रहे हैं। अब मुझे गिल्ट हो रहा है। क्या अपनी पसंद से त्योहार मनाना गलत है? परिवार को बिना दुख पहुंचाए हम उन्हें अपनी बात कैसे समझाएं? एक्सपर्ट- डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा अपनी पसंद से दिवाली मनाना बिल्कुल गलत नहीं है। शादी के बाद पति-पत्नी को कुछ फैसले अपनी पसंद, जरूरतों और सुविधाओं के हिसाब से लेने का भी हक है। त्योहार का मतलब सिर्फ रस्में निभाना और रिश्तेदारों से मिलना नहीं है। यह अपने करीबियों के साथ खुशी और सुकून के पल बिताने का मौका भी है। आप और आपके पति अगर इस बार अपने ही घर पर रहकर दिवाली मनाना चाहते हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। हालांकि, परिवार से इस बारे में बात करते हुए थोड़ी इमोशनल समझदारी जरूरी है। 1. परिवार की भावनाएं समझें परिवार के लोग आपके फैसले को अपनी तरह से समझ सकते हैं। आपकी मां को लग सकता है कि बेटी अब उनसे दूर हो रही है। सास को यह महसूस हो सकता है कि बहू ने परिवार की परंपराओं को महत्व देना छोड़ दिया है। मनोविज्ञान के नजरिए से देखें, तो कई बार लोग किसी बदलाव को अपनी अहमियत कम होने के रूप में देखते हैं। उन्हें लगता है कि पहले जो चीज जरूरी थी, अब वह मायने नहीं रखती। इसलिए जरूरी है कि आप परिवार की भावनाओं को समझें। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको उनकी हर बात माननी ही होगी। आप उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए अपने फैसले पर कायम रह सकती हैं। 2. अपनी जरूरतों को स्वार्थ न समझें आपके मन में अपराधबोध इसलिए हो सकता है, क्योंकि आप परिवार को दुखी नहीं करना चाहतीं। आप चाहती हैं कि सब खुश रहें। लेकिन जब हम दूसरों की खुशी की जिम्मेदारी पूरी तरह अपने ऊपर ले लेते हैं, तो अपनी जरूरतों को नजरअंदाज करने लगते हैं। इस स्थिति में खुद से पूछें कि क्या आप परिवार से रिश्ता तोड़ना चाहती हैं? या सिर्फ इस बार त्योहार अपने तरीके से मनाना चाहती हैं? अगर आपकी इच्छा सिर्फ थोड़ा सुकून पाने और पति के साथ समय बिताने की है, तो यह स्वार्थ नहीं है। अपनी जरूरतों को महत्व देना और दूसरों की उपेक्षा करना, दो अलग बातें हैं। आप परिवार से प्यार करते हुए भी थोड़ा वक्त अपने साथ बिता सकती हैं। 3. परिवार से बातचीत कैसे करें यहां सबसे जरूरी बात ये है कि इस बारे में फैमिली से बात कैसे करें। परिवार को अपनी बात समझाते समय यह न कहें कि हर साल उनकी वजह से आपकी दिवाली खराब होती है। ऐसी बातें तकलीफ पहुंचाती हैं और बातचीत बहस में बदल सकती है। इसकी बजाय अपनी जरूरतें बताएं। आप कह सकती हैं, "हम दोनों को परिवार के साथ त्योहार मनाना अच्छा लगता है। लेकिन हर साल आने-जाने और तैयारियों में काफी समय निकल जाता है। इस बार हम घर पर रहकर अपनी तरह से दिवाली मनाना चाहते हैं। लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि हम आपसे दूर होना चाहते हैं।" इस तरह आप अपनी बात भी रख पाएंगी और परिवार को यह भी महसूस होगा कि आप उनके रिश्ते को महत्व देती हैं। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से, अपनी भावनाओं और जरूरतों को शांत तरीके से बताना अक्सर आरोप लगाने से ज्यादा प्रभावी होता है। इससे सामने वाले के लिए आपकी बात सुनना आसान होता है। 4. रिश्तों में सीमाएं तय करना सीखें परिवार में प्यार और अपनापन जरूरी है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर त्योहार पर हर व्यक्ति की अपेक्षाएं पूरी करना आपकी जिम्मेदारी है। अगर आप हर बार दूसरों को खुश रखने के लिए अपनी इच्छा छोड़ देंगी, तो धीरे-धीरे मन में नाराजगी बढ़ सकती है। आपको लग सकता है कि आपकी पसंद और आराम की कोई अहमियत नहीं है। इसका असर आपके वैवाहिक रिश्ते पर भी पड़ सकता है। इसलिए अपनी सीमाएं तय करना जरूरी है। परिवार को बताएं कि इस बार आप घर पर रहेंगे। अगर वे नाराज होते हैं, तो उन्हें अपनी भावनाएं व्यक्त करने का मौका दें। लेकिन सिर्फ उनकी नाराजगी खत्म करने के लिए अपना फैसला बदलना जरूरी नहीं है। याद रखें, किसी का आपसे असहमत होना यह साबित नहीं करता कि आपका फैसला गलत है। 5. रिश्ते बनाए रखने के दूसरे तरीके भी अपनाएं दिवाली पर किसी के घर न जाने का मतलब यह नहीं कि आप लोग रिश्तों को महत्व नहीं देते। आप अपनी सुविधा के हिसाब से दूसरे तरीके अपना सकते हैं। मसलन, दिवाली से एक दिन पहले मायके और ससुराल जाकर मिल आएं। ऐसा संभव न हो, तो वीडियो कॉल पर बात करें। परिवार को मिठाई भेजें या त्योहार के बाद मिलने का कार्यक्रम बना लें। हालांकि, ये विकल्प तभी अपनाएं, जब आप सच में ऐसा करना चाहें। सिर्फ दूसरों को मनाने के लिए अपने ऊपर अतिरिक्त जिम्मेदारियां न डालें। 6. पति-पत्नी एक-दूसरे का साथ दें इस मामले में आपके पति की भूमिका भी अहम है। परिवार से बातचीत की जिम्मेदारी सिर्फ आपकी नहीं होनी चाहिए। आप दोनों ने मिलकर फैसला लिया है, तो उसे समझाने में भी दोनों की भागीदारी होनी चाहिए। अगर आपकी मां या सास नाराज होती हैं, तो आपके पति भी उन्हें प्यार से समझाएं। इससे यह संदेश जाएगा कि यह सिर्फ आपकी व्यक्तिगत इच्छा नहीं, बल्कि आप दोनों का साझा फैसला है। साथ ही, यह भी तय कर लें कि अगर परिवार बार-बार दबाव डालता है, तो आप दोनों कैसे प्रतिक्रिया देंगे। एक-दूसरे को दोष देने के बजाय एक-दूसरे का साथ दें। आखिर में, दिवाली मनाने का कोई एक सही तरीका नहीं है। किसी के लिए परिवार के साथ समय बिताना खुशी है, तो किसी के लिए अपने घर में शांति से त्योहार मनाना। दोनों ही तरीके सही हो सकते हैं। आपका लक्ष्य परिवार से दूरी बनाना नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी में संतुलन बनाना होना चाहिए। परिवार को आपकी बात समझने में थोड़ा समय लग सकता है। उन्हें समय दें। प्यार से बात करें, लेकिन अपनी जरूरतों को भी महत्व दें। रिश्ते तभी स्वस्थ रहते हैं, जब उनमें दूसरों की खुशी के साथ अपनी खुशी के लिए भी जगह हो। …………………..…..….. रिश्तों से जुड़ी कोई उलझन है? दिल की बात खुलकर कहें। MyTalkIndia by Dainik Bhaskar एक सेफ, कॉन्फिडेंशियल और नॉन-जजमेंटल स्पेस है, जहां आप अपनी मेंटल और इमोशनल सेहत के लिए हमारे प्रोफेशनल काउंसिलर्स से बिल्कुल फ्री में चैट कर सकते हैं। चैट करने के लिए यहां क्लिक करें। …………………..…..….. यह खबर भी पढ़िए रिलेशनशिप एडवाइज- क्या पार्टनर का फोन चेक करना गलत है: मुझे हसबैंड पर शक है, क्या चुपके से उनका फोन खोलकर देख लूं, क्या करूं पार्टनर के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखे तो मन में शक पैदा होना स्वाभाविक है। ये बातें असुरक्षा बढ़ा सकती हैं। ऐसे में फोन चेक करके सच जानने की इच्छा होना भी स्वाभाविक है।लेकिन मेरा सुझाव है कि शक होते ही उसे सच मान लेना ठीक नहीं। पूरी खबर पढ़ें…