नेपाल में आई बाढ़ के दौरान 4000 साल पुराने 'शालिग्राम' मिलने का दावा गलत

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नेपाल में हाल ही में आई बाढ़ के बाद सोशल मीडिया पर एक विशाल शालिग्राम का वीडियो तेजी से शेयर किया जा रहा है. शालिग्राम असल में एक प्राकृतिक जीवाश्म वाला अमोनइट पत्थर होता है, जिसे पवित्र माना जाता है और इसे हिमालय के काली गंडकी नदी के पास से इकट्ठा किया जाता है.दावा: इस वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि, "हिमालय से बहकर नेपाल पंहुचा विशाल शालिग्राम ! और यह भी दावा है कि यह शालिग्राम करीब 4000 साल पुराना है."इस पोस्ट का आर्काइव यहां देखें( ऐसे ही दावा करने वाले अन्य पोस्ट के आर्काइव यहां, यहां और यहां देख सकते हैं. ) क्या यह दावा सही है?: नहीं, यह दावा गलत है, क्योंकि वडियो में नजर आ रहा 'शालीग्राम' असली नहीं है.इन तस्वीरों और वीडियो में नेपाल के जोमसोम में काली गंडकी नदी के किनारे बनी एक मूर्ति दिखाई गई है, जिसका अनावरण मई 2026 में किया गया था.हमने सच का पता कैसे लगाया ?: सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे कुछ वीडियो पर लिखा था कि इसमें दिख रही चीज "पवित्र शालिग्राम से प्रेरित... पत्थर की एक विशाल कलाकृति" है. इस वीडियो में कहा गया है कि यह 'आर्टवर्क/कलाकृति' है.इन वीडियो के कुछ फ्रेम्स पर 'रिवर्स इमेज सर्च' ऑप्शन का इस्तेमाल करने से हमें 'nepaltraveller' की 11 अगस्त 2026 की यह इंस्टाग्राम पोस्ट भी मिली, जो नेपाल में आई बाढ़ से पहले की है. इस पोस्ट के कैप्शन में बताया गया है कि यह ढांचा नेपाल के जोमसोम में 22 फ़ीट ऊंची इंसानों की बनाई हुई एक मूर्ति है, जिसे जोमसोम-घारापझोंग रूरल म्युनिसिपैलिटी ने बनवाया था. View this post on Instagram A post shared by Nepal Traveller (@nepaltraveller)इस पोस्ट में बताया गया है कि इस कलाकृति का अनावरण 28 मई 2026 को एक भारतीय जगद्गुरु ने किया था.'जोमसोम शालिग्राम मूर्ति' कीवर्ड से सर्च करने पर हमें इससे जुड़ी न्यूज रिपोर्ट्स मिलीं. नेपाली न्यूज आउटलेट 'देश संचार' की इस रिपोर्ट में बताया गया कि यह मूर्ति नेपाल एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स के लोगों ने बनाई थी और इसकी मदद से उस इलाके में "धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद" थी, जो मुक्तिनाथ मंदिर के पास है.इसमें यह भी बताया गया कि कर्नाटक के श्रृंगेरी शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य महास्वामी विदुशेखर भारती महाराज ने पूजा-पाठ के बाद इस मूर्ति का उद्घाटन किया था. YouTube पर इससे जुड़े वीडियो सर्च करने के लिए हमने इससे सम्बंधित कीवर्ड सर्च किए जिसमें हम उन जगद्गुरु के YouTube चैनल तक पहुंचे और हमें इस 'मूर्ति' के उद्घाटन के वीडियो क्लिप मिले.'Rising Nepal' की एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि अकादमी की इस वर्कशॉप में 36 लोगों ने हिस्सा लिया था और उन्होंने नदी के किनारे और नदी तल में मौजूद पत्थरों से लगभग 18 मूर्तियां बनाई थीं, लेकिन "अब सबका ध्यान शालिग्राम शिला पर है जो की दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिकृति (रेप्लिका) है."यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि यह मूर्ति जोमसोम में है, जो नेपाल में हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित इलाकों से सैकड़ों किलोमीटर दूर है.जोमसोम (लाल घेरे में) बाढ़ से प्रभावित इलाकों के आस-पास कहीं नहीं है, जैसा कि इस स्क्रीनशॉट में देखा जा सकता है. निष्कर्ष: मई 2026 में अनावरण की गई शालिग्राम की एक मूर्ति के वीडियो को गलत तरीके से नेपाल में हाल ही में 'खोजे गए' असली, प्राचीन शालिग्राम के दृश्य के तौर पर शेयर किया जा रहा है.(अगर आपके पास भी ऐसी कोई जानकारी आती है, जिसके सच होने पर आपको शक है, तो पड़ताल के लिए हमारे वॉट्सऐप नंबर  9540511818 या फिर मेल आइडी webqoof@thequint.com पर भेजें. सच हम आपको बताएंगे. हमारी बाकी फैक्ट चेक स्टोरीज आप यहां पढ़ सकते हैं.)मलबे में डूबे हुए शख्स का यह वीडियो नेपाल नहीं प्रयागराज की है